ईरान के चीफ जस्टिस Gholam-Hossein Mohseni-Ejei ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है लेकिन यह केवल तर्क और समझदारी पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध से नहीं डरता और अपने राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

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अमेरिका और इसराइल से मुआवज़े की मांग क्यों की

चीफ जस्टिस Mohseni-Ejei ने बताया कि ईरान की न्यायपालिका उन लोगों को सज़ा दिलाने के लिए कानूनी कदम उठाएगी जिन्होंने युद्ध अपराध किए हैं। ईरान ने अमेरिका से उसके हमलों के लिए मुआवज़े की मांग की है। 18 अप्रैल 2026 को उन्होंने कहा था कि अमेरिका और इसराइल को 1949 के जिनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन के लिए कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अटॉर्नी जनरल और मानवाधिकार मुख्यालय को कोशिशें तेज करने के निर्देश दिए हैं।

युद्ध और बातचीत पर ईरान का क्या रुख है

  • ईरान ने स्पष्ट किया कि वह युद्ध नहीं चाहता लेकिन अगर देश के सम्मान पर बात आई तो वह पीछे नहीं हटेगा।
  • 21 अप्रैल 2026 को चेतावनी दी गई थी कि समुद्र में किसी भी तरह का दबाव युद्ध विराम का उल्लंघन माना जाएगा और ईरान इसका जवाब देगा।
  • 13 अप्रैल 2026 को उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए कहा कि अमेरिका शर्तें थोपने की कोशिश कर रहा था।
  • इरानी शिक्षाविद Foad Izadi के मुताबिक अमेरिकी और इसराइली हमलों में 2,000 से ज़्यादा आम नागरिक मारे गए हैं।

अमेरिकी सरकार और अन्य देशों की प्रतिक्रिया

अमेरिका के हाउस स्पीकर Mike Johnson ने एक बयान में कहा कि सैन्य कार्रवाई के लिए फिलहाल कांग्रेस की अनुमति की ज़रूरत नहीं है। वहीं पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। ईरान ने 20 अप्रैल 2026 को एक अमेरिकी हमले में अपने कमर्शियल जहाज़ के नुकसान की पुष्टि की थी और जवाबी कार्रवाई की बात कही थी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान अमेरिका से क्या मांग कर रहा है?

ईरान अमेरिका से उसके द्वारा किए गए हमलों के लिए मुआवज़े की मांग कर रहा है और युद्ध अपराधों के लिए कानूनी कार्रवाई करना चाहता है।

क्या ईरान युद्ध के लिए तैयार है?

ईरान ने कहा है कि वह युद्ध नहीं चाहता लेकिन वह इससे डरता भी नहीं है और अपने देश की गरिमा की रक्षा के लिए तैयार है।