ईरान और अमेरिका के बीच रिश्तों को सुधारने की कोशिशें अब एक नए मोड़ पर हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने साफ़ कर दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब दोनों देश अपनी बातों पर टिके रहेंगे। ईरान अब किसी नए समझौते के बजाय 18 जून 2026 को हुए आपसी समझौते (MoU) को पूरी तरह लागू करने पर ज़ोर दे रहा है।

‘काम के बदले काम’ का सिद्धांत

Esmaeil Baqaei ने ‘प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता’ यानी commitment for commitment के सिद्धांत को बातचीत का मुख्य आधार बताया है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों को अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करना होगा और समझौते की शर्तों को अपनी मर्ज़ी से नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने साफ़ किया कि जब तक MoU की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसी अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू नहीं होगी।

दोहा में होने वाली हलचल

ईरान ने घोषणा की है कि उसकी एक एक्सपर्ट टीम इस हफ्ते के अंत में Doha जाएगी। यह टीम MoU के आर्टिकल 11 पर चर्चा करेगी, जो ईरान की जमा की गई संपत्तियों को वापस छुड़ाने से जुड़ा है। हालांकि, Baqaei ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि उनकी अमेरिका के बड़े अधिकारियों के साथ दोहा में मुलाकात होनी है।

फंड और तेल निर्यात पर अपडेट

बातचीत के बीच कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं:

  • तेल निर्यात: अमेरिका ने MoU के आर्टिकल 10 के तहत तेल निर्यात के लिए ज़रूरी लाइसेंस जारी कर दिए हैं, जिस पर ईरान नज़र रख रहा है।
  • जमा पैसा: ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि कतर में जमा 6 अरब डॉलर ईरान को वापस मिलने चाहिए।
  • कतर का जवाब: कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Majed Al Ansari ने साफ़ किया कि अभी तक कोई भी जमा संपत्ति ईरान को नहीं सौंपी गई है और कतर सिर्फ एक मध्यस्थ का काम कर रहा है।

बयानों में विरोधाभास

इस पूरे मामले में अमेरिका और ईरान के बयानों में अंतर देखा गया है। जहाँ ईरान के प्रवक्ता ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात से इनकार किया, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान ने दोहा में मुलाकात के लिए अनुरोध किया था, जो 1 जुलाई 2026 को होनी तय हुई है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि शुरुआती बातचीत Switzerland में हुई थी।