ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फिर से अटक गई है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस मीटिंग में कोई साझा समझौता नहीं हो पाया. ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत के दौरान अमेरिका की मनमानी शर्तें बर्दाश्त नहीं करेगा. इस तनाव के बीच अब अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी करने की तैयारी में है.

बातचीत क्यों रही नाकाम और ईरान का क्या कहना है?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बताया कि बातचीत इसलिए फेल हुई क्योंकि अमेरिका अपनी एकतरफा और ज़्यादा मांगें रख रहा था. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी ज़रूरत के हिसाब से यूरेनियम समृद्ध (enrichment) करने का अपना हक नहीं छोड़ेगा और यह अधिकार अटूट है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यूरेनियम के प्रकार और स्तर पर चर्चा की जा सकती है. ईरान का मानना है कि कोई भी समझौता तभी सफल होगा जब अमेरिका ईमानदारी दिखाए और ईरान के कानूनी अधिकारों का सम्मान करे.

अमेरिका की कार्रवाई और अधिकारियों के बयान

बातचीत टूटने के बाद अमेरिका ने अपना दबाव बढ़ा दिया है. US Treasury ने आर्थिक पाबंदियां बढ़ाने का ऐलान किया और अमेरिकी सेना अब ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर सकती है. इस मामले में अलग-अलग अधिकारियों ने अपनी बात रखी है:

नाम/पद मुख्य बयान
Mohammad Javad Zarif अमेरिका शर्तों को थोपने की कोशिश कर रहा था.
Mohammad Bagher Ghalibaf अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा.
JD Vance (US VP) ईरान परमाणु हथियार न बनाने का वादा करने को तैयार नहीं था.

पाकिस्तान की भूमिका और ताज़ा स्थिति

इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा था. पाकिस्तान के आर्मी चीफ Field Marshal Asim Munir 15 अप्रैल को तेहरान पहुंचे ताकि चर्चा को आगे बढ़ाया जा सके. इसी बीच खबर आई थी कि इजराइल और लेबनान के बीच एक हफ्ते के लिए युद्धविराम (ceasefire) हो सकता है, लेकिन इजराइली अधिकारियों ने इस बात का खंडन किया है.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com