ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान में होने वाली मध्यस्थता वाली बातचीत विफल होने के बाद अब ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों के बिना बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं रखता। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी अपने खास दूतों का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया है जिससे मामला और उलझ गया है।

पाकिस्तान में बातचीत क्यों नहीं हो पाई और ट्रंप का क्या कहना है?

Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक 25 अप्रैल 2026 को यह बात सामने आई कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत सफल नहीं हुई। राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने दूत Steve Witkoff और Jared Kushner की पाकिस्तान यात्रा को अचानक रद्द कर दिया। ट्रंप ने इस फैसले पर कहा कि यात्रा में बहुत समय बर्बाद हो रहा था और अमेरिका के पास सभी पत्ते (cards) हैं।

  • पुरानी कोशिश: इससे पहले 11 और 12 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में सीधी बातचीत हुई थी पर कोई नतीजा नहीं निकला।
  • युद्ध विराम: 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच दो हफ्ते का युद्ध विराम हुआ था जिसे बाद में ट्रंप ने अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया।
  • अमेरिका का रुख: अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बंदरगाहों की नाकाबंदी इसलिए की गई है ताकि ईरान झुकने पर मजबूर हो जाए।

ईरान की मुख्य शर्तें क्या हैं और अब आगे क्या होगा?

ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पाकिस्तान का दौरा खत्म करने के बाद ओमान और रूस जाने का कार्यक्रम बनाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य नाकाबंदी और प्रतिबंध नहीं हटाता, वह किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा।

  • नाकाबंदी का मुद्दा: ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि अमेरिका ने उनके कार्गो जहाज को जब्त किया है, इसलिए अब दूसरे दौर की बातचीत की कोई योजना नहीं है।
  • आंतरिक कलह: खबरों के मुताबिक ईरान के अंदर IRGC कमांडर Ahmad Vahidi का प्रभाव बढ़ा है, जिससे वहां की सरकार अब और भी सख्त रुख अपना रही है।
  • मुख्य मांग: ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से अपनी सैन्य घेराबंदी खत्म करे।