ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब कम होता दिख रहा है। दोनों देशों ने स्विट्जरलैंड में बड़ी बैठकें की हैं और एक फाइनल समझौते के लिए 60 दिनों का समय तय किया है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर ने बीच-बचाव की अहम भूमिका निभाई है।

इस्लामाबाद समझौते से हुई शुरुआत

इस पूरी बातचीत की नींव 17 जून 2026 को पड़ी, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने रिमोटली ‘इस्लामाबाद समझौता’ (MoU) साइन किया। यह 14 पॉइंट्स का एक एग्रीमेंट है, जिसका मकसद अमेरिका, ईरान और इसराइल के बीच चल रहे विवाद को खत्म करना है।

स्विट्जरलैंड में हुई हाई-लेवल मीटिंग

इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 20 से 23 जून 2026 के बीच अमेरिका के स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची स्विट्जरलैंड पहुंचे। 21 जून को अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD वेंस और ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने भी इस बातचीत में हिस्सा लिया। इन मुलाकातों के बाद 22 जून को दोनों पक्ष एक रोडमैप पर सहमत हुए, जिसके तहत अगले 60 दिनों में अंतिम समझौता पूरा करने की कोशिश की जाएगी।

ईरान की 5 बड़ी शर्तें

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने साफ किया है कि फाइनल एग्रीमेंट तभी होगा जब इस्लामाबाद समझौते की इन 5 शर्तों को पूरा किया जाएगा:

  • सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान को पूरी तरह बंद करना।
  • अमेरिका द्वारा लगाई गई समुद्री नाकाबंदी को हटाना।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता देना।
  • ईरानी तेल के निर्यात के लिए छूट (Waivers) जारी करना।
  • ईरान की फ्रीज की गई वित्तीय संपत्ति को वापस करना।

सऊदी अरब और क्षेत्रीय अपडेट्स

24 जून 2026 को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से फोन पर बात की और उन्हें अमेरिका के साथ चल रही बातचीत की जानकारी दी। वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि इस पूरे मामले में अमेरिका अपने खाड़ी सहयोगियों के साथ पूरी तरह तालमेल बनाकर चलेगा।

परमाणु मुद्दा और लेबनान की स्थिति

उपराष्ट्रपति JD वेंस ने बताया कि ईरान परमाणु निरीक्षकों को वापस देश में आने देने पर सहमत हो गया है। हालांकि, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबदी ने स्पष्ट किया कि परमाणु निरीक्षणों का अंतिम फैसला पूरे समझौते के हिस्से के रूप में ही होगा। इसके अलावा, लेबनान में सीज़फायर (युद्धविराम) को लागू करने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाया गया है, ताकि शांति बनी रहे और जहाजों का रास्ता सुरक्षित रहे।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com