ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत पर सस्पेंस, फैसला अब संसद अध्यक्ष Ghalibaf के हाथ में, पाकिस्तान में होनी है बैठक

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। पाकिस्तान में होने वाले दूसरे दौर की बातचीत को लेकर ईरान ने अभी तक अपनी सहमति नहीं दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ़ कर दिया है कि इस बैठक में शामिल होने का अंतिम फैसला संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf लेंगे। दुनिया की नज़रें अब इस बात पर हैं कि क्या युद्धविराम खत्म होने से पहले कोई समझौता हो पाएगा।

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ईरान बातचीत में शामिल होने से क्यों हिचकिचा रहा है?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Ismail Baqa’i ने बताया कि अमेरिका के व्यवहार और संदेशों में काफी विरोधाभास है। ईरान का मानना है कि वाशिंगटन इस राजनयिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर नहीं है। ईरान ने अमेरिका पर अपने बंदरगाहों की नाकाबंदी करने का आरोप लगाया है, जिसे वह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानता है। ईरान ने साफ़ किया है कि वह केवल तभी बातचीत में शामिल होगा जब इसे फलदायी माना जाएगा।

बातचीत की शर्तें और समय सीमा क्या है?

संसद अध्यक्ष Ghalibaf ने स्पष्ट किया है कि वे धमकी के साये में कोई बातचीत नहीं करेंगे। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति Trump पर दबाव बनाने और जबरन आत्मसमर्पण कराने की कोशिश का आरोप लगाया है। इस बीच, दोनों देशों के बीच चल रहा दो हफ्ते का युद्धविराम (ceasefire) बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को सुबह 4:50 बजे पाकिस्तान समय के अनुसार खत्म हो जाएगा। Ghalibaf ने अपनी मौजूदगी को अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance की उपस्थिति से भी जोड़ा है।

पाकिस्तान की क्या तैयारी है और मौजूदा स्थिति क्या है?

पाकिस्तान इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और यह बैठक इस्लामाबाद में होनी तय हुई है। हालांकि, ईरानी मीडिया ने इस बात से इनकार किया है कि उनका कोई प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान गया है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के सूचना मंत्री Attaullah Tarar ने कहा कि वे ईरान के आधिकारिक जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं। पाकिस्तानी सूत्रों का कहना है कि अमेरिका और ईरान दोनों के प्रतिनिधिमंडल एक साथ इस्लामाबाद पहुंचेंगे। बता दें कि 11-12 अप्रैल को हुई पहली बैठक में प्रतिबंधों और परमाणु मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई थी।