ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में शांति की बातचीत चल रही है. ईरान चाहता है कि युद्ध पूरी तरह खत्म हो और उसके अधिकारों को मान्यता मिले. हालांकि, एक तरफ बातचीत हो रही है तो दूसरी तरफ समुद्र में तनाव बढ़ गया है क्योंकि अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है. इस पूरे मामले पर दुनिया की नजरें टिकी हैं कि क्या युद्ध रुकेगा या खतरा और बढ़ेगा.

पाकिस्तान में क्या बातचीत हुई और ईरान की क्या मांगें हैं?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई ने बताया कि पाकिस्तान में अमेरिका के साथ हुई बातचीत में युद्ध को पूरी तरह खत्म करने पर चर्चा हुई. ईरान ने साफ किया है कि वह न केवल प्रतिबंधों को हटाना चाहता है, बल्कि हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी कर रहा है. फिलहाल दोनों देशों के बीच पाकिस्तान के जरिए संदेश भेजे जा रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द ही अगला दौर शुरू होगा.

अमेरिका का क्या रुख है और डोनाल्ड ट्रम्प ने क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद जताई है कि यह विवाद खत्म होने के बहुत करीब है. उन्होंने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान में फिर से सीधी बातचीत हो सकती है. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने माना है कि युद्धविराम को बढ़ाने पर चर्चा तो चल रही है, लेकिन अभी तक किसी नए समझौते पर मुहर नहीं लगी है.

समुद्री रास्तों पर क्या खतरा है और कौन-कौन से देश शामिल हैं?

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह लागू कर दी है. इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर यह घेराबंदी जारी रही, तो वह लाल सागर, फारस की खाड़ी और ओमान के समुद्र में जहाजों की आवाजाही को बाधित कर सकता है. इस पूरे मामले में शामिल मुख्य पक्षों की जानकारी नीचे दी गई है:

संस्था/व्यक्ति भूमिका
ईरान प्रतिबंध हटाने और मुआवजे की मांग कर रहा है
अमेरिका बंदरगाहों की घेराबंदी की और युद्धविराम पर चर्चा कर रहा है
पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और संदेश पहुंचा रहा है
संयुक्त राष्ट्र बातचीत फिर से शुरू होने की संभावना जताई है