ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत पर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ़ कहा कि जब तक अमेरिका अपने वादों को पूरी तरह नहीं निभाता, तब तक बातचीत का कोई फायदा नहीं होगा। यह बयान उन्होंने तब दिया जब वे पाकिस्तान के सरकारी दौरे पर थे।

बातचीत की शर्तें और विवाद

राष्ट्रपति Pezeshkian ने कहा कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तय किए गए नियमों का पालन करना ज़रूरी है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कुछ बयान तय किए गए कागज़ों से अलग दिए जा रहे हैं, जिससे काम में रुकावट आती है। यह विवाद तब बढ़ा जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने परमाणु निरीक्षण (nuclear inspections) को लेकर कुछ दावे किए, जिन्हें ईरान के अधिकारियों ने गलत बताया।

स्विट्जरलैंड बैठक और नया समझौता

ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में शुरुआती तकनीकी बातचीत हुई थी। इसके बाद दोनों देशों ने ‘इस्लामाबाद समझौता’ (Islamabad MoU) साइन किया। इस समझौते के तहत अगले 60 दिनों के भीतर एक आखिरी डील तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय युद्धविराम और परमाणु निरीक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

इन 4 ग्रुप्स पर होगा काम और पैसों का लेन-देन

ईरानी डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने बताया कि बातचीत को आगे ले जाने के लिए चार वर्किंग ग्रुप बनाए गए हैं:

  • पहला ग्रुप प्रतिबंधों (sanctions) को खत्म करने पर काम करेगा।
  • दूसरा ग्रुप परमाणु मुद्दों को देखेगा।
  • तीसरा ग्रुप पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास पर ध्यान देगा।
  • चौथा ग्रुप निगरानी और लागू करने की ज़िम्मेदारी संभालेगा।

साथ ही यह भी तय हुआ कि 12 बिलियन डॉलर (6-6 बिलियन के दो हिस्से) की रकम तुरंत रिलीज़ की जाएगी।

पाकिस्तान का दौरा

इसी दौरान राष्ट्रपति Pezeshkian पाकिस्तान के आधिकारिक दौरे पर भी थे। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया क्योंकि पाकिस्तान ने शांति और बातचीत के लिए माहौल बनाने में मदद की। उन्होंने बताया कि उनका यह दौरा वाशिंगटन के साथ हुए समझौते को पूरी तरह लागू करवाने के लिए था।