अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए अब एक नए प्रस्ताव पर बात हो रही है। ईरान ने मध्यस्थ देशों को जानकारी दी है कि उसे अपने सुप्रीम लीडर से सलाह करने के लिए कुछ दिनों का समय चाहिए। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पुराने प्रस्तावों पर अपनी नाखुशी जताई है। फिलहाल दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू है जिसे ट्रंप ने आगे बढ़ा दिया है।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में क्या अड़चनें हैं?
ईरान ने बातचीत के लिए तीन चरणों वाला एक ढांचा पेश किया है। इसमें सबसे पहले अमेरिका और इसराइल के हमलों को रोकने और भविष्य में लड़ाई न होने की गारंटी मांगी गई है। दूसरे चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन की बात है, जिसे ईरान अपनी सेना के जरिए संभालना चाहता है। तीसरे चरण में परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा होगी।
- डोनाल्ड ट्रंप का रुख: ट्रंप का कहना है कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत सबसे पहले होनी चाहिए, इसे बाद के लिए टाला नहीं जा सकता।
- मार्को रुबियो की राय: अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान का प्रस्ताव पहले से बेहतर है लेकिन उसकी ईमानदारी पर संदेह है।
- ईरान का जवाब: रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलाए-निक ने कहा कि अमेरिका को अपनी अवैध मांगें छोड़नी होंगी।
सुप्रीम लीडर की स्थिति और मध्यस्थ देशों का रोल
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची रूस, ओमान और पाकिस्तान के दौरे के बाद तेहरान लौटे हैं। वह वहां शासन के नेताओं और सुप्रीम लीडर से चर्चा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई घायल हैं और सुरक्षा कारणों से उनकी लोकेशन गुप्त रखी गई है, जिसकी वजह से बातचीत की रफ्तार धीमी हो गई है।
इस पूरे मामले में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और वॉशिंगटन व तेहरान के बीच संदेश पहुंचा रहा है। ओमान जलडमरूमध्य के मुद्दे पर समन्वय कर रहा है, वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने समझौते के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
ईरान ने तीन चरणों वाला प्लान दिया है जिसमें सबसे पहले अमेरिका-इसराइल के हमलों को रोकना, फिर होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन करना और अंत में परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना शामिल है।
इस बातचीत में कौन से देश मदद कर रहे हैं?
पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है। इसके अलावा ओमान और रूस भी इस बातचीत में समन्वय करने और ईरान की मदद करने में जुटे हैं।