ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। दोनों देशों ने 14 पॉइंट्स वाले एक एमओयू (MOU) पर दस्तखत किए हैं, जिससे दुनिया भर में तनाव कम होने की उम्मीद है। यूरोपीय देशों ने भी ईरान से अपील की है कि वह परमाणु संधि के नियमों का पूरी तरह पालन करे।

क्या है यह नया समझौता

ईरान और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते को ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ कहा जा रहा है। इस डील के तहत ईरान ने भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। अगले 60 दिनों तक दोनों देश इस बात पर चर्चा करेंगे कि ईरान के परमाणु कामकाज पर क्या सीमाएं होंगी। इस दौरान अमेरिका ने कहा है कि वह ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही इलाके में अपनी सेना बढ़ाएगा।

यूरोपीय देशों और दुनिया की प्रतिक्रिया

यूरोपीय समिट ने ईरान से परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सम्मान करने को कहा है। यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इस डील का स्वागत किया और कहा कि इसे जल्द लागू करना जरूरी है। इसके अलावा G7 देशों और NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रूट ने भी इस समझौते को सही बताया है, ताकि ईरान परमाणु हथियार न बना सके और समुद्री रास्तों पर आवाजाही सुरक्षित रहे।

अमेरिका की चेतावनी और शर्तें

समझौते के साथ-साथ अमेरिका ने सख्त रुख भी अपनाया है। अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने साफ कहा है कि अगर ईरान ने अपनी बात नहीं मानी, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है और ईरान की नाकेबंदी कर सकता है। वहीं, वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने बताया कि ईरान के फ्रीज किए गए पैसे तभी वापस मिलेंगे, जब वह अपने यूरेनियम के स्टॉक को खत्म करने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

पाकिस्तान की भूमिका

इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बीच-बचाव का काम किया। उन्होंने बताया कि यह समझौता इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन किया गया है और जल्द ही स्विट्जरलैंड में इसका औपचारिक साइनिंग प्रोग्राम होगा।