ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर एक बार फिर बातचीत शुरू होने वाली है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने जानकारी दी है कि यह बातचीत दो अलग-अलग चरणों में पूरी की जाएगी। परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने जैसे बड़े मुद्दों पर दूसरे दौर की चर्चा में बात होगी।
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ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक, अमेरिका के साथ इस अंतिम समझौते पर बातचीत 19 जून 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी साफ किया कि परमाणु बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब एक अंतरिम समझौता (interim deal) लागू हो जाएगा। इस शुरुआती समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और कई पुराने विवादों को सुलझाने की कोशिश होगी।
समझौते की मुख्य बातें और शर्तें
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं:
- परमाणु कार्यक्रम की शर्तों को शुरुआती समझौते के 60 दिनों के भीतर फाइनल किया जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है।
- अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि समझौते के बाद ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को नष्ट करने या हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
- क्षेत्रीय अधिकारियों का मानना है कि इस डील के बाद ईरान पर लगे प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा और उसकी जमी हुई संपत्ति वापस मिलेगी।
- ईरानी अधिकारी माजिद तख्त-रवांची ने कहा कि इस समझौते पर साइन करने के लिए स्विट्जरलैंड को चुना जा सकता है, हालांकि जगह अभी पूरी तरह तय नहीं हुई है।
अमेरिका और ईरान का कड़ा रुख
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान में निवेश करने के लिए मजबूर नहीं है। राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि इस डील का असली मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है और अगर ईरान ने ऐसा किया तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा।
वहीं, विदेश मंत्री अरघची ने क्षेत्रीय शांति को लेकर एक बड़ी बात कही। उन्होंने बताया कि ईरान में युद्ध का अंत तभी संभव है जब लेबनान पर इजराइल का कब्जा खत्म होगा। इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भूमिका भी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिए समझौते को पूरा करने में देखी जा रही है।