ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते की उम्मीदों को एक बड़ा झटका लगा है। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक तेहरान ने साफ़ कह दिया है कि वह अपने पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) को देश की सीमाओं से बाहर नहीं भेजेगा। इस फैसले से परमाणु हथियारों को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है और नए समझौते की राह मुश्किल हो गई है।
ईरान की क्या है शर्त और अमेरिका क्यों है परेशान?
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमेनी ने आदेश दिया है कि परमाणु हथियारों के करीब पहुँच चुका यूरेनियम देश के अंदर ही रहेगा। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने बताया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब है और वह कुछ ही हफ़्तों में हथियार बनाने लायक यूरेनियम तैयार कर सकता है। अमेरिका के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक है क्योंकि ईरान यूरेनियम भंडार सौंपने को तैयार नहीं है।
- ईरान का रुख: परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख Mohammad Eslami ने साफ़ किया कि यूरेनियम संवर्धन बातचीत की मेज पर नहीं आएगा।
- बड़ी चेतावनी: ईरान के संसदीय प्रवक्ता Ebrahim Rezaei ने कहा कि अगर उन पर फिर से हमला हुआ तो वे संवर्धन को 90% तक बढ़ा सकते हैं।
- अमेरिकी डर: एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक ईरान परमाणु कार्यक्रम पर कोई रियायत देने को तैयार नहीं है।
खाड़ी देशों की मध्यस्थता और ट्रंप का फैसला
इस तनाव के बीच कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे खाड़ी देश अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर होने वाले सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया है क्योंकि उनके सहयोगियों ने भरोसा दिलाया है कि गंभीर बातचीत से समाधान निकल सकता है। ट्रंप ने साफ़ किया है कि किसी भी समझौते में यह शर्त होगी कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
- मध्यस्थता की कोशिश: मध्यस्थ देश एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ तैयार कर रहे हैं ताकि संघर्ष खत्म हो और बातचीत शुरू हो सके।
- अमेरिका की मांग: अमेरिका चाहता है कि केवल एक परमाणु केंद्र चालू रहे और 400 किलोग्राम यूरेनियम अमेरिका को सौंपा जाए।
- ईरान की मांग: ईरान ने प्रतिबंध हटाने, जमी हुई संपत्ति वापस लेने और युद्ध के नुकसान की भरपाई की मांग की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान यूरेनियम को अपने देश से बाहर क्यों नहीं भेजना चाहता?
ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए संवर्धित यूरेनियम को अपने पास रखना चाहता है और इसे अपने संप्रभु अधिकार के रूप में देखता है।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में खाड़ी देशों की क्या भूमिका है?
सऊदी अरब, कतर और UAE जैसे देश मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं ताकि युद्ध को टाला जा सके और बातचीत के जरिए परमाणु कार्यक्रम का समाधान निकाला जाए।
