ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत का सिलसिला अभी भी जारी है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। इस्लामाबाद में हुई बड़ी बैठक के बाद भी अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है, लेकिन कूटनीतिक प्रयास अब भी चल रहे हैं।
इस्लामाबाद वार्ता में क्या हुआ और क्यों नहीं बनी बात?
10 और 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक बातचीत चली। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान की तरफ से स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने नेतृत्व किया। हालांकि, कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन 2-3 बड़े मुद्दों पर दोनों देशों की राय बहुत अलग थी, जिस वजह से 12 अप्रैल को बिना किसी अंतिम समझौते के बातचीत खत्म हो गई।
अमेरिका और ईरान की मुख्य मांगें क्या हैं?
दोनों देशों के बीच अभी भी काफी अविश्वास है और दोनों अपनी-अपनी शर्तें रख रहे हैं। अमेरिका ने शांति वार्ता के दूसरे दौर के लिए कुछ नई शर्तें रखी हैं, वहीं ईरान अपने अधिकारों और हर्जाने की मांग कर रहा है।
| पक्ष | मुख्य शर्तें और मांगें |
|---|---|
| अमेरिका (US) | Strait of Hormuz का पूरी तरह और बिना रोक-टोक खुलना और ईरानी टीम के पास IRGC की पूरी मंजूरी होना। |
| ईरान (Iran) | युद्ध का हर्जाना मिलना, परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण मानना और अपने कानूनी अधिकारों की मान्यता। |
आगे क्या होने वाला है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बताया कि पाकिस्तान की मदद से बातचीत अभी भी चल रही है। आने वाले दिनों में पाकिस्तानी अधिकारी तेहरान जा सकते हैं ताकि दोनों पक्षों के नजरिए पर चर्चा हो सके। वहीं ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ किया है कि युद्धविराम के बावजूद उनकी सेना पूरी तरह तैयार है।
