ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता अब संकट में दिख रही है। पाकिस्तान में होने वाली अगली मीटिंग को लेकर ईरान ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की तरफ से मिलने वाले संदेशों में तालमेल नहीं है, जिसकी वजह से बातचीत आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही है।

ईरान ने बातचीत में देरी क्यों की?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि अमेरिका के विरोधाभासी बयानों और हरकतों की वजह से वे अभी कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं। ईरानी विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा कि अमेरिका की उकसावे वाली हरकतें शांति बातचीत में बड़ी बाधा हैं। इसके अलावा, 13 अप्रैल से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी और ईरानी जहाज M/V Touska को पकड़ने की घटना ने माहौल और बिगाड़ दिया है। ईरान इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और सीजफायर का उल्लंघन मान रहा है।

सीजफायर और अमेरिका का सख्त रुख

दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से लागू हुआ दो हफ्ते का सीजफायर 23 अप्रैल को खत्म होने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान को भारी तबाही का सामना करना पड़ेगा। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance को भी मीटिंग के लिए रवाना होने में देरी हुई है क्योंकि उनकी कुछ अतिरिक्त पॉलिसी मीटिंग्स चल रही हैं।

पाकिस्तान की तैयारी और वर्तमान स्थिति

पाकिस्तान इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और आंतरिक मंत्री Mohsin Naqvi ने ईरान के राजदूत को बताया है कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्री Ishaq Dar ने भी संवाद जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया है। हालांकि, ईरान के संसदीय स्पीकर Mohammad Bagher Qalibaf ने स्पष्ट कर दिया है कि धमकी के साये में कोई बातचीत स्वीकार नहीं की जाएगी।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.