ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खत्म करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने बताया कि देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने का फैसला किया है। इस बीच दुनिया भर में इस बात की चर्चा है कि क्या दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई शांति समझौता होगा।

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क्या है पूरा मामला

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि रविवार, 14 जून को एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। इस डील से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल जाएगा और ईरान के परमाणु हथियारों पर रोक लगेगी। लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने इस बात को कम किया। उन्होंने कहा कि अभी कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है और यह डील कल यानी 15 जून को नहीं होगी, बल्कि आने वाले कुछ दिनों में हो सकती है।

समझौते की शर्तें और मुश्किलें

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बताया कि दोनों देश इस कोशिश में हैं कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म हो। उन्होंने कहा कि परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरुआती समझौते के 60 दिनों के बाद पूरी होगी। वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबफ ने बातचीत पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि बेरुत के दक्षिणी इलाकों में इसराइल के हवाई हमलों के बाद अब अमेरिका से बात करने का कोई फायदा नहीं दिख रहा है।

मध्यस्थता और दुनिया की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ इस पूरे मामले में बीच-बचाव कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि अगले 24 घंटों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समझौते पर साइन हो सकते हैं, जिसके बाद तकनीकी बातचीत होगी। दूसरी तरफ, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई है क्योंकि उन्हें डर है कि इस डील से इसराइल की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

  • समझौता: 14 पॉइंट्स वाला एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है जिसे SNSC ने रिव्यू किया है।
  • मुख्य शर्तें: इसमें प्रतिबंध हटाने, अमेरिकी सेना की वापसी और मुआवजे की बातें शामिल हैं।
  • मध्यस्थ: पाकिस्तान और कतर इस डील को करवाने में मदद कर रहे हैं।