अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ एक शांति समझौते का ऐलान किया है। ट्रंप के मुताबिक इस डील में लेबनान का मुद्दा भी शामिल है और इसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। लेकिन इसी बीच इसराइल ने बेरूत में हमला कर दिया है, जिससे इस समझौते पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या है ट्रंप का दावा

President Trump ने कहा कि यह समझौता परमाणु हथियारों के खिलाफ एक दीवार की तरह काम करेगा। उन्होंने बताया कि इस डील के बाद Hormuz Strait को तुरंत फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप का यह भी कहना है कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं चाहता और अमेरिका उनके परमाणु कचरे को ठिकाने लगाने में मदद करेगा।

ईरान और अन्य देशों का क्या कहना है

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने माना कि दोनों पक्ष लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय और मीडिया ने 14 जून को डील साइन होने की बात पर शक जताया है और कहा कि अभी आखिरी फैसला नहीं हुआ है। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने उम्मीद जताई कि यह समझौता जल्द पूरा हो जाएगा। कतर के बातचीत करने वाले लोग भी इस मामले को सुलझाने के लिए तेहरान पहुंचे हैं।

इसराइल का हमला और तनाव

एक तरफ जहां समझौते की बातें चल रही थीं, वहीं दूसरी तरफ Israel ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों में Hezbollah के एक कमांड सेंटर पर हमला किया। इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई। इस घटना पर राष्ट्रपति ट्रंप ने नाराजगी जताई और कहा कि इसराइल को यह हमला नहीं करना चाहिए था।

सुरक्षा और शर्तें

इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ कर दिया है कि वे लेबनान में अपने सुरक्षा क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Qalibaf ने चेतावनी दी है कि इसराइल के हमलों की वजह से शांति बातचीत का आखिरी दौर खतरे में पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर युद्ध खत्म करने की कोई भी डील होगी, तो उसमें लेबनान का जिक्र जरूर होगा।