ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग को खत्म करने के लिए एक समझौते पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इस संभावित समझौते को लेकर अहम जानकारियां सामने आई हैं। कतर और पाकिस्तान जैसे देश इस मामले में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं और तेहरान में लगातार बातचीत का दौर जारी है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सभी मोर्चों पर जंग को रोकना और क्षेत्र में शांति स्थापित करना है।

समझौते के मसौदे में क्या-क्या शर्तें शामिल हैं?

इस संभावित समझौते के तहत अमेरिका बातचीत के दौरान ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए तैयार हो गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग इसके लिए अस्थायी छूट जारी करेगा। इसके अलावा, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए 30 दिनों का समय तय किया गया है और परमाणु बातचीत के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। अमेरिका ने एक पुनर्निर्माण और विकास कोष स्थापित करने का भी प्रस्ताव दिया है ताकि प्रभावित क्षेत्रों को मदद मिल सके।

परमाणु कार्यक्रम और बाकी विवादित मुद्दों पर ईरान का क्या रुख है?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया है कि परमाणु मुद्दे को इस शुरुआती समझौते का हिस्सा नहीं बनाया गया है और इस पर बाद में अलग से चर्चा होगी। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह परमाणु प्रतिबद्धताओं के बदले जंग खत्म करने के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा। इसके अलावा, ईरान के फ्रीज किए गए फंड को वापस पाने और युद्ध के मुआवजे की मांग पर अभी भी दोनों देशों के बीच बातचीत फंसी हुई है, जिसे सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या इस शांति समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सहमति बन गई है?

नहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया है कि परमाणु मुद्दा शुरुआती समझौते का हिस्सा नहीं है। इसके लिए अलग से 60 दिनों का समय तय किया गया है जिस पर बाद में बात होगी।

इस समझौते में प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका ने क्या प्रस्ताव दिया है?

अमेरिका ने बातचीत के दौरान ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने और अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा छूट देने का प्रस्ताव दिया है।

इस बातचीत में कौन से देश मध्यस्थता कर रहे हैं?

पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल तेहरान में रहकर लगातार मध्यस्थता कर रहे हैं। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे क्षेत्रीय देश भी इस प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com