ईरान और अमेरिका के बीच एक शांति समझौता हुआ है, जिससे दुनिया भर में हलचल मच गई है। इस डील की पुष्टि ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने की है। दोनों देशों ने सहमति जताई है कि वे अब एक अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की बातचीत करेंगे।

समझौते की शर्तें

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत की प्रक्रिया में तभी आगे बढ़ेगा जब अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां पूरी करेगा। इसमें युद्ध को रोकना, नाकाबंदी हटाना और ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस करना शामिल है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अगर प्रगति हुई तो 60 दिनों की इस अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

हस्ताक्षर और मध्यस्थता

इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर दस्तखत करने के लिए स्विट्जरलैंड को चुना गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने बताया कि यह समारोह 19 जून को होगा। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मध्यस्थ के रूप में अहम भूमिका निभाई है, जबकि Qatar ने भी इस समझौते का स्वागत किया है।

प्रमुख बिंदु

  • ब्लॉकड और पैसे: Donald Trump ने Strait of Hormuz की नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का ऐलान किया है। समझौते में ईरान के 24 बिलियन डॉलर के जमी हुए फंड को छोड़ने की बात कही गई है।
  • परमाणु बातचीत: 60 दिनों के इस समय में परमाणु मुद्दों पर चर्चा को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसे पहले 30 दिनों के भीतर सुलझाने की कोशिश होगी।
  • क्या बाहर रहेगा: ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और अन्य प्रतिरोध समूहों को दिए जाने वाले समर्थन पर कोई बातचीत नहीं होगी।

हालांकि, यह रास्ता इतना आसान नहीं है। ईरान के भीतर कुछ कट्टरपंथी गुट इस समझौते का विरोध कर रहे हैं और वहां प्रदर्शन भी हुए हैं। साथ ही, इसराइल के अधिकारियों ने भी इस डील की कड़ी आलोचना की है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com