अमेरिका और ईरान के बीच एक नए शांति समझौते (MOU) की खबर आई है जिससे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद है। लेकिन इस बीच इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कर दिया है कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार नहीं मिलने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चाहे कोई डील हो या न हो, इसराइल अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने रविवार, 14 जून 2026 को ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने और Strait of Hormuz को खोलने के लिए एक समझौता हुआ है। इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर 19 जून को दस्तखत होंगे। ईरान के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि एक MOU तैयार हुआ है, जिससे ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म होगी और मौजूदा युद्धविराम को आगे बढ़ाया जाएगा।
इस समझौते के तहत शुक्रवार से Strait of Hormuz को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। कोशिश यह है कि अगले 30 दिनों के भीतर यहाँ जहाजों की आवाजाही पहले जैसी हो जाए। हालांकि, यह कोई अंतिम शांति समझौता नहीं है, बल्कि एक शुरुआती ढांचा है। इसमें परमाणु प्रोग्राम जैसे अनसुलझे मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है।
नेतन्याहू की चेतावनी और दावा
सोमवार, 15 जून को यरुशलम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Benjamin Netanyahu ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जब तक वह इसराइल के प्रधानमंत्री हैं, ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दिए जाएंगे। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और इसराइल ने मिलकर तेहरान के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन चलाया था, जिसने ईरान के परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम को काफी नुकसान पहुँचाया है। उनके मुताबिक इस हमले से ईरान को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है।
नेतन्याहू ने यह भी माना कि वह और राष्ट्रपति Donald Trump हर बात पर एकमत नहीं होते और उन्हें इस डील की सभी शर्तों की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और इसराइल अपनी रक्षा के लिए तैयार रहेगा।
अन्य देशों और अधिकारियों की राय
- Donald Trump: उन्होंने कहा कि ईरान पूरी तरह सहमत है कि वह परमाणु हथियार नहीं रखेगा और उन्होंने ईरान के नए नेतृत्व की तारीफ की।
- António Guterres: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इस डील का स्वागत किया और इसे संघर्ष खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
- क्षेत्रीय समर्थन: इस बातचीत को सफल बनाने में पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों ने अहम भूमिका निभाई है।
इस बीच कुछ मुद्दे अब भी अटके हुए हैं, जैसे लेबनान में युद्धविराम का उल्लंघन और Strait of Hormuz में फीस वसूलने को लेकर ईरान के दावे। इन पेचीदा मुद्दों और परमाणु प्रोग्राम पर आगे की तकनीकी बातचीत अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की अगुवाई में इस हफ्ते होगी।