ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने क्षेत्र में गड़बड़ी फैलाने वालों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि शांति के लिए किए गए वादों को निभाना बहुत जरूरी है। यह बात उन्होंने अमेरिका के साथ चल रही शांति बातचीत के बीच कही है ताकि तनाव को कम किया जा सके।
US-Iran शांति समझौता और पाकिस्तान की भूमिका
ईरान और अमेरिका के बीच एक 14 पॉइंट का शांति समझौता (MoU) हुआ है। इस पर राष्ट्रपति Pezeshkian और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दस्तखत किए थे। इस समझौते का मकसद दुश्मनी को खत्म करना, Strait of Hormuz को फिर से खोलना, प्रतिबंधों में राहत देना और डिप्लोमैटिक रिश्तों को सुधारना है। इस पूरे समझौते में Pakistan ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
इस समझौते के तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर युद्धविराम और बाकी बचे मुद्दों पर बातचीत करेंगे। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इस फैसले को 90% से ज्यादा समर्थन दिया है। बताया गया है कि 19 जुलाई 2026 को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर औपचारिक रूप से साइन होंगे।
क्षेत्रीय तनाव और आंतरिक फैसले
शांति की कोशिशों के बावजूद तनाव बना हुआ है। 8 जुलाई को ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका द्वारा दक्षिणी और पूर्वी ईरान पर किए गए हमलों को ‘war crimes’ बताया था। राष्ट्रपति Pezeshkian ने कहा कि ईरान के फैसले समझदारी और मानवीय गरिमा पर आधारित होते हैं, लेकिन बिना वजह की धमकियों का करारा जवाब दिया जाएगा।
राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि अमेरिका के साथ बातचीत या युद्ध का आखिरी फैसला सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का होगा। उन्होंने सभी गुटों से इन फैसलों का पालन करने को कहा है और बातचीत करने वाली टीम पर गलत आरोप लगाने से मना किया है।
