ईरान और अमेरिका के बीच चल रही खींचतान अब एक नए मोड़ पर आ गई है। ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए 14 पॉइंट्स वाला एक प्लान भेजा था, जिस पर अमेरिका ने अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाए ने तेहरान में मीडिया को संबोधित करते हुए इस पूरे मामले की जानकारी दी है।
ईरान के 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव में क्या बातें थीं
- यह प्लान पूरी तरह से क्षेत्र में युद्ध खत्म करने पर केंद्रित था, जिसमें लेबनान भी शामिल है।
- प्रवक्ता बगाए ने साफ किया कि इस प्लान में परमाणु क्षेत्र से जुड़ी कोई बात नहीं थी और फिलहाल कोई परमाणु बातचीत नहीं हो रही है।
- ईरान ने मांग की थी कि भविष्य में सैन्य हमलों के खिलाफ गारंटी दी जाए और अमेरिकी सेना को ईरान के पास के इलाकों से हटाया जाए।
- प्रस्ताव में समुद्री पाबंदियों को खत्म करने, जमी हुई संपत्तियों को वापस करने और मुआवजे के भुगतान की मांग भी शामिल थी।
- इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए एक नया ढांचा तैयार करने की बात कही गई थी।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और डोनाल्ड ट्रंप का फैसला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव उनके लिए स्वीकार्य नहीं है और वह इस ऑफर से संतुष्ट नहीं हैं। यह जवाब पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरान तक पहुँचाया गया था। इसके साथ ही अमेरिका अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू करने वाला है।
बातचीत के लिए किन देशों ने मदद की
इस राजनयिक प्रक्रिया में पाकिस्तान ने एक बीच के रास्ते की तरह काम किया और दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान कराया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ओमान और जर्मनी के समकक्षों को भी ईरान की इन कोशिशों के बारे में बताया। बता दें कि 8 अप्रैल 2026 को युद्धविराम लागू हुआ था, जिसके बाद इस्लामाबाद में बातचीत हुई थी लेकिन वहां कोई समझौता नहीं हो पाया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या ईरान का शांति प्रस्ताव परमाणु समझौते से जुड़ा था
नहीं, प्रवक्ता इस्माइल बगाए ने स्पष्ट किया कि यह 14 सूत्रीय योजना केवल क्षेत्र में युद्ध खत्म करने के लिए थी और इसमें परमाणु क्षेत्र का कोई जिक्र नहीं था।
अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव पर क्या कहा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि वह इस ऑफर से संतुष्ट नहीं हैं, इसलिए यह स्वीकार्य नहीं है।