ईरान में युद्ध के बीच एक छोटी सी राहत आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद अब लोग धीरे-धीरे अपने काम पर वापस लौट रहे हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हुई है, जिससे बमबारी में कमी आई है। हालांकि, आम लोगों के लिए महंगाई और आर्थिक संकट अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है।

शांति वार्ता और युद्धविराम की क्या स्थिति है?

अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 को दो हफ्ते का युद्धविराम तय हुआ था। इस समझौते में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच आमने-सामने बातचीत शुरू हुई। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस कर रहे हैं। वहीं ईरान ने साफ किया है कि उसकी सेना अभी भी पूरी तरह तैयार है और किसी भी उल्लंघन का जवाब तुरंत दिया जाएगा।

दोनों देशों ने बातचीत में क्या शर्तें रखी हैं?

शांति समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग शर्तें हैं, जिन्हें नीचे टेबल में देखा जा सकता है:

ईरान की मांगें अमेरिका की मांगें
सैन्य हमलों पर रोक की गारंटी परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी
अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना
लेबनान में इजरायली हमलों का अंत क्षेत्रीय स्थिरता की शर्तें
जमे हुए संपत्तियों की वापसी ईरानी गतिविधियों पर नियंत्रण

आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है?

युद्धविराम के बाद तेहरान के ग्रैंड बाजार में चहल-पहल तो बढ़ी है, लेकिन व्यापार अब भी मंदा है। दुकानदारों का कहना है कि बिक्री बहुत कम हो रही है। ईरान के भीतर यह डर है कि खराब आर्थिक हालात सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। दूसरी तरफ इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम को काफी नुकसान पहुँचाया है, लेकिन लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखे हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com