ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की खबरें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार शाम को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि, यह बातचीत तभी होगी जब ईरान की शर्तें मानी जाएंगी। इस बीच सऊदी अरब भी इस इलाके में तनाव कम करने और स्थिरता लाने के लिए कोशिशें कर रहा है।

🗞️: Israeli Ambassador का बड़ा बयान, हिजबुल्ला के साथ नहीं होगा युद्धविराम, लेबनान सरकार के साथ शुरू होगी शांति वार्ता

ईरान की क्या शर्तें हैं और क्या है विवाद

ईरान ने साफ किया है कि बातचीत शुरू करने के लिए दो मुख्य शर्तें पूरी होनी चाहिए। पहली शर्त लेबनान में युद्धविराम (ceasefire) कराना है और दूसरी शर्त ईरान की जमी हुई संपत्तियों को वापस लौटाना है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल के लेबनान पर हमले जारी रहे, तो बातचीत करना बेकार होगा।

अमेरिका का रुख और बाकी देशों की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस को इस बातचीत के लिए पाकिस्तान भेजा है। ट्रंप ने कहा है कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। साथ ही उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखने की बात भी कही है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने भी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की है ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।

क्या ईरानी प्रतिनिधि पाकिस्तान पहुंच चुके हैं

प्रतिनिधियों के आने को लेकर खबरें अलग-अलग हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि ईरानी अधिकारी इस्लामाबाद पहुंच गए हैं, लेकिन ईरान की तस्निम न्यूज़ एजेंसी ने इस बात से इनकार किया है। एजेंसी का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता, कोई बातचीत नहीं होगी। इसी बीच कुवैत ने ईरान पर ड्रोन हमले का आरोप लगाया है और सऊदी अरब की एक बड़ी रिफाइनरी को युद्ध के कारण नुकसान पहुंचा है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com