अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्ते से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बड़ी बैठक होने जा रही है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के बीच हाई-प्रोफाइल बातचीत होगी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ अपने-अपने देशों की तरफ से इस बातचीत का नेतृत्व करेंगे। दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या यह बैठक युद्ध को पूरी तरह रोक पाएगी।

ईरान की शर्तें और अमेरिका की चेतावनी क्या है?

ईरान ने साफ किया है कि बातचीत शुरू होने के लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए। पहली यह कि लेबनान में युद्धविराम हो और दूसरी यह कि ईरान की जमी हुई संपत्तियां वापस मिलें। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा है कि अगर ईरान ने ceasefire का पालन नहीं किया तो उसे बड़े हमलों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि वह ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे और Strait of Hormuz में किसी भी टोल टैक्स को मंजूरी नहीं देंगे।

बातचीत में कौन-कौन से बड़े नेता शामिल हैं?

इस बैठक में अमेरिका, ईरान और मेजबान पाकिस्तान के कई बड़े अधिकारी शामिल हो रहे हैं। मुख्य प्रतिनिधियों की सूची नीचे दी गई है:

देश मुख्य प्रतिनिधि/नेता
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति JD Vance, स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुश्नर
ईरान स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, अली अकबर अहमदियान, अब्दोलनासेर हेम्मती
पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इशाक डार, आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, गृह मंत्री मोहसिन नकवी

अन्य जरूरी बातें और ताज़ा अपडेट

दोनों देशों के बीच 7 अप्रैल से दो हफ्ते का युद्धविराम चल रहा है, लेकिन लेबनान और इसराइल के बीच अभी भी हमले जारी हैं। ईरान में पिछले 1000 घंटों से इंटरनेट बंद है, जिससे वहां हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। साथ ही अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन आने वाले हफ्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस बातचीत का स्वागत किया है और इसे शांति का एक बड़ा मौका बताया है।