ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी खबर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. दावा किया जा रहा है कि ईरान ने पकड़े गए एक अमेरिकी पायलट के बदले 10,000 फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ने की मांग रखी है. हालांकि अमेरिकी सरकार ने इस तरह के किसी भी दावे को स्वीकार नहीं किया है और अपने दूसरे लापता पायलट के सुरक्षित रेस्क्यू की पुष्टि कर दी है. इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं.

अमेरिकी पायलट के पकड़े जाने और रेस्क्यू की क्या है सच्चाई?

3 अप्रैल 2026 को ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में अमेरिका का एक F-15E लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. विमान के गिरने के बाद से ही इसके क्रू मेंबर्स को लेकर सस्पेंस बना हुआ था. अमेरिकी सेना ने इस मामले पर आधिकारिक जानकारी साझा की है:

  • विमान गिरने के तुरंत बाद पहले क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया था.
  • दूसरा पायलट करीब 24 घंटे तक पहाड़ी इलाके में छिपकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा.
  • 5 अप्रैल 2026 की सुबह अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज ने एक बड़े अभियान के तहत दूसरे पायलट को भी बचा लिया है.
  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया है कि पायलट सुरक्षित है और उसे इलाज के लिए ले जाया गया है.
  • अमेरिकी विदेश विभाग ने 4 अप्रैल को ही साफ कर दिया था कि उनका कोई भी पायलट ईरान की कैद में नहीं है.

क्या सच में हुई है 10,000 फिलिस्तीनी कैदियों की मांग?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे में कहा गया है कि ईरान के एक सैन्य प्रवक्ता ने कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव दिया है. लेकिन स्वतंत्र सूत्रों और आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की है. जानकारों का मानना है कि यह केवल एक प्रोपेगेंडा हो सकता है क्योंकि पायलट पहले ही अमेरिकी सेना के पास सुरक्षित पहुंच चुका है. सोशल मीडिया पर जो वीडियो पायलट के पकड़े जाने के नाम पर शेयर किए गए थे, उन्हें भी जांच में पुराना और फर्जी पाया गया है. फिलहाल स्थिति यह है कि अमेरिका ने अपने दोनों सैन्य कर्मियों के सुरक्षित होने की बात कहकर इन दावों को पूरी तरह नकार दिया है.