ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़े समझौते की तैयारी चल रही है। दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर बातचीत अंतिम चरण में है। इस बीच ईरान की सरकार ने देश में राजनीतिक एकता बनाए रखने की अपील की है ताकि डिप्लोमैटिक प्रोसेस को सही तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

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ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बताया कि इस समझौते पर 14 जून को हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले कुछ दिनों में इस पर साइन होने की पूरी संभावना है। प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि Strait of Hormuz में दी गई सेवाओं का भुगतान पाना ईरान का अधिकार है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक यह इलाका ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है।

खबरों के मुताबिक, इस समझौते के लिए 14 पॉइंट का एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इस ड्राफ्ट में कुछ मुख्य बातें शामिल हैं:

  • लड़ाई और संघर्ष को हमेशा के लिए पूरी तरह बंद करना।
  • अमेरिका की ओर से ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने का वादा।
  • 30 दिनों के भीतर समुद्री नाकाबंदी (naval blockade) को पूरी तरह हटाना।
  • ईरान के आसपास के इलाकों से अमेरिकी सेना की वापसी।

विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि यह समझौता काफी करीब है और इसका मकसद ईरानी लोगों की जीत को मजबूत करना है। वहीं IRNA न्यूज़ एजेंसी ने जानकारी दी कि इस समझौते के बाद 60 दिनों की बातचीत होगी। इसमें केवल तीन मुद्दों पर चर्चा होगी: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जारी रखना, अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना और मुआवजे का तरीका तय करना।

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी डील के तहत यूरेनियम संवर्धन (enrichium enrichment) के अपने अधिकार को नहीं छोड़ेगा। साथ ही, परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत केवल ईरान के बुनियादी सिद्धांतों के दायरे में ही होगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि ईरान की मिसाइल क्षमताएं इस समझौते के एजेंडे का हिस्सा नहीं होंगी।

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों का जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि यह डील जल्द ही फाइनल हो सकती है। फिलहाल ईरान की सरकार इस प्रस्ताव के कानूनी और तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है।