ईरान ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने और अपनी फंसी हुई दौलत वापस पाने की मांग रखी है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए भेजा गया था ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

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ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखीं?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Ismail Bakaei ने सोमवार को बताया कि उन्होंने कोई रियायत नहीं मांगी है, बल्कि सिर्फ अपने वैध अधिकारों की बात की है। ईरान ने अपनी मांगों में इन मुख्य बिंदुओं को रखा है:

  • क्षेत्रीय युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना।
  • अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना।
  • विदेशी बैंकों में सालों से रुकी हुई ईरानी जनता की संपत्तियों को वापस दिलाना।
  • ईरानी तेल बिक्री पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने के लिए 30 दिन का समय देना।
  • लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई बंद करना।

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ किया कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण करना नहीं है, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।

अमेरिका का जवाब और समुद्र में बढ़ता खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने पिछले 47 वर्षों में कई देशों को धोखा दिया है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर फ्रांस या ब्रिटेन के युद्धपोत वहां तैनात किए गए, तो वह निर्णायक प्रतिक्रिया देगा। साथ ही, ईरान जलडमरूमध्य के प्रबंधन के लिए एक नया 12-सूत्रीय कानून तैयार कर रहा है। इस नए नियम के तहत इजरायली जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं होगी और अन्य सभी जहाजों को ईरान से लाइसेंस और अनुमति लेनी होगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका कौन निभा रहा है

पाकिस्तान इस मामले में ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रहा है और ईरान ने अपना जवाब पाकिस्तान के माध्यम से ही अमेरिका को भेजा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए ईरान का नया कानून क्या है

ईरान एक 12-सूत्रीय कानून बना रहा है, जिसके तहत इजरायली जहाजों के प्रवेश पर रोक होगी और अन्य जहाजों को वहां से गुजरने के लिए ईरान से लाइसेंस लेना होगा।