अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने बिचौलिए की भूमिका निभाई है। 10 मई 2026 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने पुष्टि की कि उन्हें अमेरिका के प्रस्ताव पर ईरान का जवाब मिल गया है। यह कदम क्षेत्र में शांति लाने और युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी कोशिश है।
ईरान ने अपने जवाब में क्या शर्तें रखी हैं?
ईरान ने अपने जवाब में मुख्य रूप से युद्ध रोकने और समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया है। इसमें Persian Gulf और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करने की बात कही गई है। ईरान ने अमेरिका से अपनी कुछ प्रमुख माँगें भी रखी हैं:
- अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया जाए।
- विदेशों में जमा ईरान की संपत्ति को वापस दिया जाए।
- Strait of Hormuz में नेविगेशन और प्रभाव के मुद्दों पर चर्चा हो।
- क्षेत्रीय संघर्ष खत्म होने के बाद एक व्यापक समझौते के लिए 30 दिनों का समय दिया जाए।
समझौते में कौन से मुद्दे अड़चन बन सकते हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परमाणु कार्यक्रम और समृद्ध यूरेनियम को लेकर अभी भी दोनों देशों में मतभेद हैं। ईरान का प्रस्ताव है कि वह अपने यूरेनियम स्टॉक का कुछ हिस्सा अमेरिका को देने के बजाय किसी तीसरे देश को सौंप सकता है। फिलहाल कोशिश यह है कि एक अस्थायी समझौता (MoU) किया जाए जिससे युद्ध रुक सके और समुद्री व्यापार फिर से सामान्य हो सके।
पाकिस्तान की इस पूरी प्रक्रिया में क्या भूमिका रही?
इस शांति प्रयास में पाकिस्तान ने मध्यस्थ के रूप में काम किया है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने बताया कि Army Commander Field Marshal Syed Asim Munir ने जवाब मिलने की पुष्टि की। इसके अलावा Deputy Prime Minister Ishaq Dar के प्रयासों की भी सराहना की गई। इससे पहले 8 अप्रैल 2026 को भी पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम करवाया था, जिससे करीब 40 दिनों तक हमलों में कमी आई थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान का जवाब पाकिस्तान को कब मिला?
ईरान का औपचारिक जवाब 10 मई 2026 को पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए प्राप्त हुआ, जिसकी पुष्टि प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने की।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में युद्ध को रोकना, प्रतिबंधों को हटाना और Strait of Hormuz में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
