अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन मामला अभी सुलझता नहीं दिख रहा है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे खुश नहीं हैं। ट्रंप ने साफ किया है कि वह इस डील से संतुष्ट नहीं हैं और अब देखना होगा कि आगे क्या होता है।

अमेरिका ने ईरान के सामने क्या शर्तें रखी हैं?

अमेरिकी स्पेशल एनवॉय Steve Witkoff ने ड्राफ्ट प्लान में कुछ जरूरी बदलाव किए हैं। अमेरिका की मुख्य मांग यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगाए। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) को एक जगह से दूसरी जगह न भेजे और न ही इन साइटों पर कोई नई परमाणु गतिविधि शुरू करे। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Olivia Wales ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान को कम से कम दस साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद करना होगा और अपने स्टॉक को हटाना होगा।

ईरान के नए प्रस्ताव में क्या बातें कही गई थीं?

ईरान ने 29 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मदद से अपना नया प्रस्ताव अमेरिका को भेजा था। इस प्रस्ताव में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए समुद्री यातायात को फिर से बहाल करने की बात कही थी। ईरान चाहता था कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गंभीर चिंताओं और चर्चाओं को फिलहाल के लिए टाल दिया जाए और उन्हें भविष्य की बातचीत के लिए रखा जाए। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक मध्यस्थ (mediator) के तौर पर काम कर रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच मौजूदा स्थिति क्या है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 मई 2026 को अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि ईरान डील करना तो चाहता है लेकिन वह इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के नेतृत्व के अंदर आपसी मतभेद हो सकते हैं, जिसकी वजह से बातचीत में दिक्कत आ रही है। इससे पहले 26 अप्रैल को ट्रंप ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी और विदेश नीति टीम के साथ सिचुएशन रूम में इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या डोनाल्ड ट्रंप ईरान के नए प्रस्ताव से सहमत हैं?

नहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह ईरान के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें अंतिम समझौते तक पहुँचने पर संदेह है।

इस बातचीत में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच एक मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है और ईरान के प्रस्ताव को अमेरिका तक पहुँचाने का जरिया बना है।