ईरान और अमेरिका के बीच चल रही खींचतान अब एक नए मोड़ पर आ गई है। ईरान का दावा है कि उसने अमेरिका के प्लान पर एक बहुत ही सकारात्मक और सही जवाब दिया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अब दुनिया की नज़रें इस बात पर हैं कि चीन इस मामले में क्या भूमिका निभाता है।
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखीं?
ईरान ने अपना प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया। इस प्लान में ईरान ने अपनी कुछ मुख्य मांगें रखी हैं, जिन्हें वह पूरा करवाना चाहता है। ईरान की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत रोका जाए।
- भविष्य में ईरान पर किसी भी तरह के हमले न करने की गारंटी मिले।
- अमेरिका ईरान पर लगी सभी पाबंदियां और समुद्री नाकेबंदी हटाए।
- ईरानी तेल की बिक्री पर लगी पाबंदियों को 30 दिनों के भीतर खत्म किया जाए।
- ईरान की जमा की गई संपत्ति को वापस रिलीज किया जाए।
- युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खमेनेई और IRGC कमांडरों की मौत और बुनियादी ढांचे की तबाही शामिल है।
डोनाल्ड ट्रंप का जवाब और चीन का रोल
जब ईरान का जवाब अमेरिका पहुंचा, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अपनी सोशल मीडिया साइट Truth Social पर “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया। वहीं, ईरान के सूत्रों का कहना है कि ट्रंप की नाराजगी से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और उनकी टीम सिर्फ अपने लोगों के हक की बात कर रही है।
इस बीच, यह खबर भी सामने आई है कि डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही बीजिंग जाने वाले हैं। वहां वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ईरान के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। इससे पहले 3 मई को ईरान ने एक तीन चरणों वाला शांति प्रस्ताव भी दिया था, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे खोलने और यूरेनियम संवर्धन को 3.6% तक रखने की बात कही गई थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने अमेरिका से मुआवजे की मांग क्यों की है
ईरान ने युद्ध के दौरान हुए बुनियादी ढांचे के नुकसान और अपने सुप्रीम लीडर अली खमेनेई व वरिष्ठ कमांडरों की मौत के बदले मुआवजे की मांग की है।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में पाकिस्तान की क्या भूमिका है
पाकिस्तान इस बातचीत में एक मध्यस्थ की तरह काम कर रहा है और ईरान ने अपना जवाब पाकिस्तान के जरिए ही अमेरिका तक पहुंचाया है।
