ईरान और अमेरिका के बीच एक नया समझौता हो सकता है जिससे मिडिल ईस्ट की राजनीति पूरी तरह बदल जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस शांति समझौते को ईरान के सर्वोच्च नेता ने मंजूरी दे दी है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई और सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ेगा।

समझौते में क्या-क्या शर्तें शामिल हैं

ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, इस प्रस्तावित समझौते के मसौदे में 14 मुख्य बातें शामिल हैं। इसमें सबसे ज़रूरी बात यह है कि ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को खत्म किया जाएगा। साथ ही, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को 30 दिनों के भीतर फिर से खोला जाएगा। इसके तहत अमेरिका ईरान के आसपास से अपनी सेना वापस बुलाएगा और ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा करेगा। अमेरिका भी ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा और उसकी संप्रभुता का सम्मान करेगा।

पैसे और फंड का हिसाब-किताब

इस समझौते में पैसों के लेन-देन को लेकर बड़े प्रावधान किए गए हैं। अमेरिका विदेशों में जमे हुए ईरान के फंड जारी करेगा ताकि तनाव कम हो सके।

विवरण राशि
तुरंत जारी होने वाला फंड 24 अरब डॉलर
पुनर्निर्माण योजना के लिए राशि 300 अरब डॉलर

अब तक क्या हुआ और क्या है ताज़ा स्थिति

12 जून 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इस सप्ताह के अंत में यूरोप में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी वहां मौजूद रहेंगे। ट्रंप ने कहा कि हस्ताक्षर होते ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य तुरंत खुल जाएगा। हालांकि, ईरान ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। ईरान की मेहर एजेंसी ने ब्रिटिश मीडिया के उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि समझौते का टेक्स्ट फाइनल हो गया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत अभी जारी है और सब तय होने के बाद ही औपचारिक घोषणा होगी।

मध्यस्थों की भूमिका और अन्य देशों का रुख

इस बातचीत को सफल बनाने में पाकिस्तान और ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की और बहरीन जैसे देशों को इस समझौते के समर्थकों के रूप में बताया है। दूसरी ओर, इज़राइल ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके सूत्रों का कहना है कि उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता की मंजूरी की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। इज़राइल ने यह भी साफ किया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा।