स्विट्जरलैंड के Burgenstock में आज ईरान, अमेरिका, पाकिस्तान और कतर के बीच एक बहुत बड़ी डिप्लोमैटिक मीटिंग शुरू हुई है। इस बातचीत का मकसद दुनिया के तनाव को कम करना और आपसी समझौतों पर काम करना है। इस हाई-लेवल मीटिंग में चारों देशों के बड़े नेता शामिल हुए हैं ताकि क्षेत्रीय समस्याओं का हल निकाला जा सके।

यह बैठक रविवार, 21 जून 2026 को आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुताबिक, सुबह के समय ईरान के अधिकारियों की पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थों के साथ अलग-अलग बैठकें हुईं। इसके बाद दोपहर में चारों देशों के प्रतिनिधियों ने एक साथ बैठकर चर्चा की। बता दें कि पहले यह मीटिंग शुक्रवार को होनी थी, लेकिन लेबनान में बढ़ते तनाव की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया था।

यह पूरी चर्चा अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए एक 14 पॉइंट के समझौते (MoU) के बाद हो रही है। इस समझौते के तहत 60 दिनों के लिए युद्धविराम (ceasefire) किया गया है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तकनीकी बातचीत का ढांचा तैयार किया गया है। इस मीटिंग में मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा लगाई गई समुद्री नाकाबंदी हटाने और ईरान द्वारा Strait of Hormuz को फिर से जहाजों के लिए खोलने पर बात होने की उम्मीद है।

बैठक में शामिल मुख्य लोग:

  • अमेरिका: उपराष्ट्रपति JD Vance इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके साथ स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर भी मौजूद हैं।
  • ईरान: संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान का प्रतिनिधित्व किया।
  • पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मध्यस्थ के तौर पर वहां पहुंचे हैं।
  • कतर: प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने इस बातचीत में अपना पूरा समर्थन दिया है।

इस बीच, लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रही जंग पर बात करने के लिए शेड्यूल में एक इमरजेंसी सेशन भी जोड़ा गया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि इजराइल ने युद्धविराम की शर्तों को तोड़ा है, जिसके विरोध में ईरान ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका इस समुद्री रास्ते पर टोल टैक्स वसूलना शुरू कर देगा।

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने इस पूरी बातचीत के लिए एक गोपनीय और सुरक्षित माहौल मुहैया कराया है ताकि दोनों पक्ष बिना किसी दबाव के बातचीत कर सकें।