ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को रोकने के लिए एक समझौता हुआ है, लेकिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर दोनों देशों के बीच खींचतान अब भी जारी है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कहा है कि इस जलमार्ग पर ईरान का पूरा हक है और अमेरिका की वजह से उन्हें अपनी ताकत दिखाने की ज़रूरत पड़ी। इस बीच, दोनों देशों के बीच एक समझौते पर बात बनी है, जिसका औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में होने वाला है।
समझौते की मुख्य शर्तें और समय सीमा
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस बीच के समझौते (MOU) में कुछ खास बातों पर सहमति बनी है, ताकि समुद्र में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।
| तारीख/समय | क्या होगा |
|---|---|
| 14 जून 2026 | संघर्ष खत्म करने के लिए शुरुआती समझौता हुआ |
| 19 जून 2026 | जेनेवा में औपचारिक MOU साइन होगा |
| 30 दिन के अंदर | अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी हटाएगा और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पहले जैसी होगी |
| 60 दिन तक | व्यापारिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के रास्ता दिया जाएगा और प्रतिबंधों पर बातचीत होगी |
फीस और हक को लेकर विवाद
समझौते के बावजूद ‘फीस’ को लेकर दोनों देशों की राय अलग है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यह रास्ता लंबे समय तक बिना किसी टोल के खुला रहना चाहिए। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई का कहना है कि ईरान और ओमान मिलकर ट्रैफिक संभालेंगे और इसके लिए सर्विस फीस लेंगे। ईरान की IRGC ने भी दावा किया है कि वे 60 दिनों तक फीस नहीं लेंगे, लेकिन उसके बाद सर्विस चार्ज वसूलना शुरू कर देंगे।
ट्रम्प की चेतावनी और ताजा हालात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले तो नाकाबंदी हटाने की बात कही, लेकिन बाद में चेतावनी दी कि यह समझौता अभी अंतिम नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान ने ठीक से व्यवहार नहीं किया, तो वे फिर से बमबारी शुरू कर सकते हैं।
तनाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 14 जून को डिजिटल साइन होने के बाद भी ईरान ने कुछ मालवाहक जहाजों पर ड्रोन से हमला किया, जिन्हें अमेरिकी सेना ने बीच में ही रोक दिया। फिलहाल समुद्र में जहाजों की आवाजाही बहुत कम है और डर का माहौल बना हुआ है।
आर्थिक राहत और अन्य मांगें
इस समझौते के तहत ईरान को बड़ी आर्थिक मदद मिल सकती है, जिसमें करीब 300 अरब डॉलर का रिकंस्ट्रक्शन फंड और तुरंत तेल निर्यात शुरू करने की अनुमति शामिल है। वहीं, ईरान के negotiator ग़ालिबाफ ने यह भी मांग की है कि इसराइल को लेबनान के कब्जे वाले इलाकों से पूरी तरह बाहर निकलना होगा।