दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, Strait of Hormuz को फिर से खोलने की तैयारी चल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति हुई है, जिसके बाद राष्ट्रपति Trump ने सैन्य अभियान ‘Project Freedom’ को फिलहाल रोकने का फैसला किया है। इस बीच ईरान की IRGC ने भी संकेत दिए हैं कि नए नियमों के साथ इस रास्ते को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोला जा सकता है।

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UN Security Council के प्रस्ताव में क्या शर्तें हैं?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक नया ड्राफ्ट प्रस्ताव लाया गया है। इस प्रस्ताव को अमेरिका के साथ-साथ सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देशों ने मिलकर सपोर्ट किया है। इस प्रस्ताव की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • ईरान को जहाजों पर होने वाले हमलों को तुरंत रोकना होगा।
  • समुद्री रास्ते पर वसूले जाने वाले अवैध टोल टैक्स को बंद करना होगा।
  • समुद्र में बिछाई गई सभी माइन्स (बारूदी सुरंगों) की सही लोकेशन बतानी होगी।
  • मानवीय सहायता के लिए एक कॉरिडोर बनाने में मदद करनी होगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि यह प्रस्ताव शांतिपूर्ण समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र के लिए एक असली परीक्षा है।

ईरान और अमेरिका का इस पर क्या कहना है?

इस पूरे मामले पर दोनों देशों की सोच अलग है लेकिन बातचीत जारी है। ईरान की IRGC ने 6 मई 2026 को कहा कि जब हमलावरों की तरफ से खतरा खत्म होगा, तब नए प्रोटोकॉल के साथ रास्ता खोला जा सकता है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Trump ने कहा कि ईरान के साथ समझौते में काफी तरक्की हुई है, इसलिए सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाई गई है।

वहीं ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने साफ किया कि वह इस रास्ते के लिए एक ऐसा मैनेजमेंट मॉडल चाहते हैं जिसमें अमेरिका की कोई भूमिका न हो। ईरान के अधिकारी Ebrahim Azizi ने यह भी चेतावनी दी कि इस समुद्री व्यवस्था में अमेरिका का कोई भी हस्तक्षेप युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Strait of Hormuz को खोलने के लिए कौन से देश साथ आए हैं?

इस रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिका के साथ सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत और कतर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया है।

ईरान ने रास्ता खोलने के लिए क्या शर्त रखी है?

ईरान की IRGC ने कहा है कि रास्ता तभी खुलेगा जब बाहरी हमलावरों की तरफ से खतरा खत्म होगा और नए प्रोटोकॉल लागू होंगे।