Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि इस अहम समुद्री रास्ते पर अब उसका पूरा कब्ज़ा है। राजनीतिक एक्सपर्ट Sultan Barakat का कहना है कि अब बातचीत की मेज पर ईरान का पलड़ा भारी नजर आ रहा है और अमेरिका अपनी पुरानी शर्तों से पीछे हट रहा है।
ईरान की चेतावनी और कंट्रोल
ईरान की सबसे बड़ी मिलिट्री कमांड Khatam al-Anbiya ने 30 मई 2026 को बताया कि Strait of Hormuz पूरी तरह से ईरान की सेना के नियंत्रण में है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी विदेशी मिलिट्री जहाज ने यहां दखल देने की कोशिश की, तो उसका जवाब दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि इस रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों को ईरान के नियमों का पालन करना होगा, वरना उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। IRGC ने भी पुष्टि की है कि वे इस क्षेत्र के लिए दिए गए खास निर्देशों को सख्ती से लागू करेंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच बदलती स्थिति
Hamad Bin Khalifa University के प्रोफेसर Sultan Barakat ने बताया कि समय अब ईरान के पक्ष में जा रहा है। उनके मुताबिक, ईरान अब बहुत आत्मविश्वास के साथ अमेरिका से बातचीत कर रहा है। पहले अमेरिका ने ‘जीरो एनरिचमेंट’ जैसी बहुत सख्त शर्तें रखी थीं, लेकिन अब अमेरिका धीरे-धीरे अपने उन फैसलों से पीछे हट रहा है।
पैसे और संपत्ति का मामला
बातचीत में पैसों का मुद्दा भी अहम है। ईरान अपनी उन संपत्तियों को वापस चाहता है जो विदेशों में फ्रीज हैं। Barakat ने बताया कि ईरान की नजर खासकर चीन में रखे करीब 40 अरब डॉलर पर है, जो तेल निर्यात के बदले वहां जमा हैं। हालांकि, अब ईरान के लिए इन पैसों की तुरंत जरूरत उसके अस्तित्व के लिए अनिवार्य नहीं रह गई है।
खाड़ी देशों की सुरक्षा और असर
क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता पर चर्चा करते हुए बताया गया कि अमेरिका और इसराइल के हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी देशों की शांति को हिला दिया है। हवाई क्षेत्र बंद होने और बुनियादी ढांचे पर खतरों की वजह से कई पश्चिमी कंपनियों ने अपना काम रोक दिया और लोगों को वहां से बाहर निकाला गया।
भविष्य की रणनीति
Sultan Barakat ने सुझाव दिया कि खाड़ी देशों को अब अपनी सुरक्षा व्यवस्था को फिर से परखने और आपसी कूटनीति को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि Qatar जैसे देशों को अपनी आर्थिक रणनीति में इन सुरक्षा जोखिमों को शामिल करना होगा ताकि यह क्षेत्र लड़ाई का मैदान बनने के बजाय व्यापार और जुड़ाव का केंद्र बना रहे।
