Hormuz Strait तनाव: ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं कड़ी शर्तें, समुद्री रास्ते को लेकर फंसा पेंच.

फारस की खाड़ी यानी पर्शियन गल्फ में तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। 8 अगस्त 2026 को ईरान की सेना के प्रवक्ता Hossein Mohebbi ने साफ कर दिया है कि अमेरिका को हॉर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए ईरान की सभी शर्तें माननी ही पड़ेंगी। इस अहम समुद्री रास्ते पर व्यापार और सुरक्षा को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच खींचतान काफी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर वहां काम करने वाले प्रवासियों और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।
ईरान की शर्तें और अमेरिका का स्टैंड
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohammad Baqer Zolghadr ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं सुधारेगा, तब तक यह जलमार्ग नहीं खुलेगा। ईरान की मांगों में प्रमुख रूप से सैन्य धमकियों को रोकना, नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना, क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी, युद्ध के हर्जाने का भुगतान, सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करना शामिल है। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बताया कि ओमान के साथ एक नए शिपिंग रूट पर चर्चा आखिरी दौर में है, लेकिन यह हॉर्मुज के पूरी तरह खुलने की गारंटी नहीं देता है क्योंकि इसके लिए भी ईरान ने अमेरिका द्वारा जून समझौते के उल्लंघन के हर्जाने जैसी कई शर्तें जोड़ दी हैं।
तनाव के बीच आर्थिक और व्यापारिक असर
दूसरी तरफ, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान-ओमान वार्ता में प्रगति की उम्मीद जताई है। उपराष्ट्रपति JD Vance ने इसे लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं और कहा है कि ईरान खुद इस टकराव को खत्म करने का इच्छुक है। हालांकि, पूर्व रक्षा मंत्री Mark Esper ने इसे लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर ओमान और ईरान मिलकर इस रास्ते का प्रबंधन करते हैं तो यह अमेरिका के लिए ठीक नहीं होगा। 8 अगस्त 2026 को ही UAE ने आरोप लगाया है कि ईरान ने हॉर्मुज में एक ADNOC जहाज को मिसाइल से निशाना बनाया। इस घटना के बाद से 2 अगस्त 2026 से अब तक इस रास्ते से होने वाले कमर्शियल शिपिंग ट्रैफिक में 96 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय प्रवासियों और कारोबार पर असर
खाड़ी के देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय और अन्य प्रवासी इन परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। तेल और जरूरी सामान की आवाजाही पर लगे इस प्रतिबंध का असर सीधे तौर पर बाजार की कीमतों पर पड़ता है। जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो शिपिंग और लॉजिस्टिक सेक्टर से जुड़े लोगों को काम में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। आम लोगों के लिए जरूरी है कि वे आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करें और मौजूदा हालात को देखते हुए अपने व्यापारिक और यात्रा संबंधी फैसले लें।