Strait of Hormuz को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच खींचतान तेज हो गई है। अमेरिका ने खाड़ी देशों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक प्रस्ताव पेश किया है ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनी रहे। वहीं ईरान ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह गलत और राजनीतिक बताया है और दुनिया के देशों से इसे खारिज करने की मांग की है।
🗞️: UAE ने ईरान को दी चेतावनी, परमाणु कार्यक्रम और आतंकी हमलों को बताया एक ही खेल, अब होगा कड़ा जवाब।
अमेरिका के प्रस्ताव में क्या हैं मुख्य मांगें?
अमेरिका ने बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर के साथ मिलकर एक मसौदा तैयार किया है। इस प्रस्ताव के जरिए ईरान पर कई तरह के दबाव बनाए गए हैं:
- हमलों पर रोक: ईरान से मांग की गई है कि वह Strait of Hormuz में जहाजों पर हमले और खदान बिछाने जैसी गतिविधियां बंद करे।
- खदानों की जानकारी: प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान अपनी बिछाई गई समुद्री खदानों की संख्या और जगह का खुलासा करे और उन्हें हटाने में मदद करे।
- मानवीय गलियारा: जरूरी सामान, खाद और सहायता पहुंचाने के लिए एक सुरक्षित मानवीय गलियारा बनाने का आह्वान किया गया है।
- सख्त कार्रवाई: यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 7 के तहत है, जिसका मतलब है कि बात न मानने पर ईरान पर प्रतिबंध या सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
ईरान ने इस प्रस्ताव को क्यों नकारा?
ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने इस पूरे प्रस्ताव को दोषपूर्ण और राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका इस मुद्दे को सुलझाने के बजाय अपना राजनीतिक एजेंडा चला रहा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, संकट का असली समाधान युद्ध को पूरी तरह खत्म करना और समुद्री नाकाबंदी हटाना है।
हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नामक नौसेना अभियान को फिलहाल रोक दिया है और ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो बमबारी तेज की जाएगी। वर्तमान में ईरान एक 14-सूत्रीय समझौते (MoU) की समीक्षा कर रहा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और अमेरिकी प्रतिबंध हटाने पर बात हो सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz का विवाद क्या है?
यह दुनिया का एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। अमेरिका और खाड़ी देश चाहते हैं कि यहां जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो, जबकि ईरान इसे अपना क्षेत्रीय जल मानता है और सुरक्षा कारणों से यहां नियंत्रण रखता है।
अगर ईरान UN के प्रस्ताव को नहीं मानता तो क्या होगा?
चूंकि यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 7 के तहत है, इसलिए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई या कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।