स्विट्ज़रलैंड के Bürgenstock Resort में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता शुरू हो गई है। रविवार, 21 जून 2026 को शुरू हुई इस बातचीत का मुख्य मकसद इलाके में जारी तनाव को कम करना है। ईरान ने अपनी तीन मुख्य शर्तें रखी हैं जिनके पूरा होने पर ही वह अंतिम समझौते की बात करेगा।

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ईरान की तीन मुख्य शर्तें

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने बताया कि तेहरान के लिए तीन बातें सबसे ज़रूरी हैं। पहला, लेबनान में पूरी तरह से युद्धविराम (ceasefire) होना चाहिए। दूसरा, ईरान को अपना तेल फिर से बेचने की अनुमति मिले और तीसरा, उसके फ्रीज किए गए पैसों को वापस लौटाया जाए। बाक़ाए ने साफ़ कहा कि लेबनान में युद्धविराम के बिना अंतिम समझौते की बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि वह स्विट्ज़रलैंड सिर्फ इसलिए आए हैं ताकि अमेरिका को उसके वादों की याद दिला सकें। वहीं, सुप्रीम लीडर के सलाहकार Mohammad Mokhber ने चेतावनी दी कि ईरान सिर्फ कागज़ी समझौते से खुश नहीं होगा और अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी होंगी।

अमेरिका का रुख और लेबनान का मुद्दा

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि परमाणु मुद्दे और लेबनान में युद्धविराम पर तरक्की होगी। पहले इस बातचीत का फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने, तेल प्रतिबंध हटाने और फ्रीज किए गए एसेट्स पर था, लेकिन अब लेबनान के मुद्दे को भी इसमें जोड़ दिया गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी और तनाव

शनिवार, 20 जून 2026 को ईरान ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया था। ईरान का आरोप है कि इसराइल ने लेबनान में युद्धविराम के समझौते को तोड़ा है। ईरान ने कहा कि जब तक इसराइल सार्वजनिक रूप से युद्धविराम नहीं मानता, तब तक यह जलमार्ग नहीं खुलेगा। इस कदम से बातचीत में नई मुश्किलें पैदा हो गई हैं क्योंकि समझौते में इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही को लेकर बात हुई थी।

मध्यस्थ देश और आर्थिक मुद्दे

इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Field Marshal Asim Munir शामिल हैं, जबकि कतर के प्रधानमंत्री Mohammed Al Thani भी मौजूद हैं।

आर्थिक मुद्दों पर बात करें तो ईरान के 100 अरब डॉलर से ज़्यादा फ्रीज हैं। फिलहाल चर्चा इस बात पर हो रही है कि कतर के ज़रिए शुरुआती 6 अरब डॉलर की राशि कैसे जारी की जाए। ईरान ने 17 जून को तेल निर्यात फिर से शुरू कर दिया था, लेकिन Strait of Hormuz की बंदी ने इसे फिर पेचीदा बना दिया है।