ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में चली लंबी बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। दोनों देशों की टीमें 21 घंटे तक चर्चा करती रहीं, लेकिन किसी समझौते पर सहमति नहीं बन पाई। इस विफलता के बाद अमेरिका ने Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए नाकेबंदी का आदेश दे दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

बातचीत क्यों नहीं हो पाई और मुख्य विवाद क्या थे?

ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। ईरान ने अपनी शर्तों और अधिकारों की बात की, जबकि अमेरिका ने परमाणु हथियारों के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ किया कि वॉशिंगटन ने अपना आखिरी और सबसे अच्छा ऑफर दे दिया था।

विवाद का मुख्य मुद्दा अमेरिका का रुख ईरान का रुख
परमाणु कार्यक्रम पूर्ण तरह खत्म करने की मांग परमाणु अधिकारों का दावा
यूरेनियम स्टॉकपाइल इसे छोड़ने का दबाव स्टॉकपाइल रखने पर अड़ा
Strait of Hormuz मुक्त आवाजाही की मांग जलमार्ग पर नियंत्रण की मांग
शिपिंग टोल टैक्स देने से इनकार जहाजों से शुल्क वसूलने की मांग
विश्वास की कमी ईरान से प्रतिबद्धता की मांग अमेरिका पर भरोसा नहीं

Strait of Hormuz की नाकेबंदी और ईरान की चेतावनी

बातचीत टूटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को तुरंत Strait of Hormuz की नाकेबंदी करने का निर्देश दिया है। ट्रंप ने कहा कि कोई भी देश अमेरिका को इस जलमार्ग में बाधित नहीं कर सकता और अमेरिका को अपने तेल की आपूर्ति के लिए इस रास्ते की ज़रूरत नहीं है।

इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि जो भी सैन्य जहाज Strait of Hormuz के करीब आएंगे, उन्हें सख्त और जोरदार जवाब दिया जाएगा। ईरान का दावा है कि गैर-सैन्य जहाजों के लिए जलमार्ग पर उसका पूरा नियंत्रण बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन का बयान

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि अगर अमेरिकी सरकार अपनी विस्तारवादी नीति छोड़े और ईरान के लोगों के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौता हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान संतुलित और निष्पक्ष समझौते के लिए तैयार है, लेकिन उसकी राष्ट्रीय हित की लाल रेखाएं तय हैं।

दुनिया के अन्य देशों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया और ईरान की सुरक्षा गारंटी की बात कही। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बाध्यकारी समझौते की अपील की है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.