ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई अहम बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। करीब 21 घंटे तक चली इस लंबी चर्चा के बाद भी दोनों देशों के बीच किसी युद्धविराम समझौते पर सहमति नहीं बन पाई। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि उनका देश बातचीत के लिए पूरी गंभीरता से आया था, लेकिन कामयाबी दूसरे पक्ष के नजरिए पर निर्भर करती है।

बातचीत में क्या रहा मुख्य मुद्दा और क्यों नहीं हुआ समझौता?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि वॉशिंगटन को ईरान से परमाणु हथियारों के खिलाफ कोई ठोस वादा नहीं मिला, जिस वजह से डील नहीं हो सकी। वहीं ईरान ने शांति के लिए कुछ शर्तें रखी थीं और कहा था कि भविष्य में हमलों को रोकने की गारंटी मिलनी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ किया कि वे चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो और ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को छोड़ दे।

इस हाई-लेवल मीटिंग से जुड़ी बड़ी बातें

विवरण जानकारी
स्थान इस्लामाबाद, पाकिस्तान
कुल समय करीब 21 घंटे की चर्चा
मध्यस्थ देश पाकिस्तान (प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ)
ईरानी प्रतिनिधि मोहम्मद बागर कालिबाफ
अमेरिकी प्रतिनिधि उपराष्ट्रपति JD Vance
मुख्य विवाद परमाणु हथियार और समुद्री सुरक्षा
वर्तमान स्थिति तकनीकी टीमें अब एक्सपर्ट टेक्स्ट का आदान-प्रदान करेंगी

अन्य देशों का इस मामले पर क्या कहना है?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन से फोन पर बात की। उन्होंने आग्रह किया कि इस्लामाबाद की बातचीत के मौके का फायदा उठाकर तनाव को कम किया जाए। मैक्रॉन ने एक ऐसे सटीक और बाध्यकारी समझौते की जरूरत बताई जिससे पूरे इलाके में सुरक्षा बनी रहे और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का रास्ता पूरी तरह सुरक्षित रहे।