अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर बड़ी खबर आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बयान दिया है कि दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बन गई है, लेकिन समझौता अभी अंतिम चरण में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, इसराइल इस बातचीत को लेकर काफी परेशान नजर आ रहा है और ईरान का कहना है कि इसराइल इस डील को खराब करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

ईरान और अमेरिका की डील पर क्या बोले प्रवक्ता इस्माइल बघाई?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 25 मई 2026 को मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि अमेरिका के साथ समझौता पत्र के कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर सहमति बन चुकी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के बदलते रुख और फैसले लेने में देरी की वजह से समझौता तुरंत होने की उम्मीद नहीं है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य फिलहाल चल रहे युद्ध को खत्म करना है। परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर समझौते के बाद अगले 60 दिनों में चर्चा की जाएगी। बघाई ने चेतावनी दी कि इसराइल इस समझौते को रोकने और बातचीत बिगाड़ने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच क्या बातचीत हुई?

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई है। ट्रंप ने नेतन्याहू को भरोसा दिया है कि वह इसराइल की सुरक्षा और हर खतरे के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार का समर्थन करते हैं। ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ तब तक कोई समझौता साइन नहीं किया जाएगा जब तक कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म नहीं कर देता। इधर नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक तस्वीर शेयर करते हुए साफ लिखा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। इसराइल को चिंता है कि इस पूरी बातचीत में उसे किनारे किया जा रहा है।

स्ट्रेट ऑफ हारमुज को लेकर नया मोड़ और अमेरिकी रुख

इस बातचीत के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हारमुज को खोलने और परमाणु मामलों पर बातचीत शुरू करने का एक प्रस्ताव सामने है। वहीं ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हारमुज में जहाजों को मिलने वाली सर्विस के लिए फीस वसूलने की योजना बनाई है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता और उस पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक इस क्षेत्र में अमेरिकी पाबंदियां पूरी तरह लागू रहेंगी। इस बातचीत में सऊदी अरब, यूएई, कतर, पाकिस्तान और मिस्र जैसे कई अन्य मध्य पूर्वी देशों की भूमिका भी बताई जा रही है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस समझौते का वर्तमान मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना है। परमाणु से जुड़े जटिल मुद्दों पर इसके बाद के 60 दिनों के भीतर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

इसराइल इस बातचीत का विरोध क्यों कर रहा है?

इसराइल को डर है कि इस समझौते से उसे किनारे कर दिया जाएगा और वह ऐसे किसी भी समझौते के खिलाफ है जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की शर्त न हो।