ईरान और अमेरिका के बीच लेबनान युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत में बड़ी कामयाबी मिली है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि पाकिस्तान और कतर की मदद से दोनों देशों के बीच अच्छी सहमति बनी है। स्विट्जरलैंड में हुई इस हाई-लेवल मीटिंग के बाद अब युद्ध रोकने की उम्मीद जगी है।
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समझौते की मुख्य बातें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच एक डिजिटल MoU (समझौता ज्ञापन) साइन किया गया है। इस समझौते का मुख्य मकसद लेबनान और अन्य मोर्चों पर युद्ध को पूरी तरह खत्म करना और लेबनान की संप्रभुता को बचाना है।
- ईरान को राहत: अब ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियां हटाई जाएंगी।
- ब्लॉकड और संपत्ति: ईरान पर लगी नाकेबंदी खत्म कर दी गई है और उनके कुछ फ्रीज किए हुए पैसे भी वापस किए जाएंगे।
- विकास योजना: ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए एक बड़ा प्लान शुरू किया जाएगा।
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य: ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को कमर्शियल जहाजों के लिए फिर से खोलने का वादा किया है। यह 30 दिनों के भीतर पूरी तरह चालू हो जाएगा और शुरुआती 60 दिनों तक यहां कोई टोल नहीं लगेगा।
आगे की योजना और शर्तें
दोनों देशों ने लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने पर सहमति जताई है, जिसमें पाकिस्तान और कतर की मदद ली जाएगी। इसके अलावा, अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में ढील देने पर बातचीत जारी रहेगी।
इसराइल का रुख
इस बातचीत में इसराइल शामिल नहीं था और वह अलग से लेबनान के साथ बातचीत कर रहा है। इसराइल ने साफ कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपनी सेना बनाए रखेगा। इसराइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग ने कहा है कि अगर ईरान हिजबुल्लाह के जरिए दखल देता रहा, तो लेबनान के साथ शांति समझौता करना नामुमकिन होगा।
