ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर दुनिया की नजरों में है. ईरान के न्यायपालिका प्रमुख Gholamhossein Mohseni Eje’i ने 1 मई 2026 को यह साफ कर दिया कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि ईरान किसी भी तरह के दबाव या थोपी गई शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा.

ईरान की बातचीत के लिए क्या हैं शर्तें?

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह बातचीत से कभी पीछे नहीं हटा, लेकिन अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता भी नहीं करेगा. ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने 27 अप्रैल 2026 को बताया कि बातचीत तभी संभव है जब अमेरिका ईरान की 10 शर्तों को माने. इन शर्तों में परमाणु संवर्धन के अधिकार को मान्यता देना, पुराने नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देना और होर्मुज जलडमरूमध्य के मैनेजमेंट को ईरान के पास रखना शामिल है.

अमेरिका और ईरान के बीच अभी क्या स्थिति है?

दोनों देशों के बीच संबंध इस समय काफी खराब हैं और सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है. मौजूदा हालात कुछ इस तरह हैं:

  • अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लगा रखी है.
  • जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को काफी हद तक बंद कर दिया है.
  • 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में बातचीत का एक दौर हुआ था, लेकिन बिना किसी समझौते के वह खत्म हो गया.
  • ईरान ने साफ कहा है कि जब तक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं होती, वह आगे की बातचीत में शामिल नहीं होगा.

ईरान के बड़े नेताओं ने क्या कहा?

ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Mojtaba Khamenei ने एक संदेश में कहा कि अमेरिका को युद्ध के दौरान शर्मनाक हार मिली और ईरान अपनी परमाणु और मिसाइल ताकत की रक्षा करेगा. वहीं, राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 30 अप्रैल 2026 को चेतावनी दी कि वाशिंगटन पर से भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है और अमेरिका बातचीत के दौरान भी ईरान पर हमला कर सकता है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत क्यों रुकी हुई है?

बातचीत मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी और ईरान की 10 कठिन शर्तों के कारण रुकी हुई है, जिस पर दोनों पक्ष सहमत नहीं हैं.

ईरान की मुख्य मांगें क्या हैं?

ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके परमाणु संवर्धन के अधिकार को माने, उसे हर्जाना दे और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन का अधिकार ईरान को मिले.