अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक बड़ी खबर आ रही है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत में सकारात्मक प्रगति हो रही है। इस बातचीत में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देश आपसी मतभेदों को कम करने और एक समझौता ज्ञापन यानी MOU को अंतिम रूप देने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

ℹ: ईरान और पाकिस्तान ने अमेरिका को भेजा नया प्रस्ताव, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने और जंग ख़त्म करने पर रविवार को आ सकता है फैसला.

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में क्या प्रगति हुई?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 23 मई 2026 को जानकारी दी कि बातचीत में मतभेद कम हो रहे हैं। दोनों पक्ष एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MOU को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं। पाकिस्तान के शक्तिशाली सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर 22 मई को तेहरान पहुंचे थे, जहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची के साथ इस मध्यस्थता को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बैठकें कीं। हालांकि, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कुछ गहरे और महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री का क्या रुख है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह बातचीत के सकारात्मक रुख और मध्य पूर्व के सहयोगियों के अनुरोध के कारण ईरान पर सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह विवाद जल्द ही समाप्त हो जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बातचीत में प्रगति की बात स्वीकार की है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कूटनीति विफल रहती है तो अमेरिका के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। अमेरिका की मुख्य मांग है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और होर्मुज जलडमरू मध्य यानी Strait of Hormuz का रास्ता खुला रहना चाहिए।

शांति समझौते के बीच क्या हैं मुख्य चुनौतियां?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को बताया कि अमेरिका की अत्यधिक मांगें शांति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि किसी भी भविष्य के समझौते के लिए सभी मोर्चों पर पूर्ण संघर्षविराम होना अनिवार्य है। खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की नजरें भी इस बातचीत पर टिकी हैं क्योंकि वे भी इस मध्यस्थता के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में मध्यस्थ कौन है?

इस बातचीत में मुख्य रूप से पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसमें उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर सक्रिय हैं। इसके अलावा सऊदी अरब, कतर और यूएई भी इसमें मदद कर रहे हैं।

अमेरिका की मुख्य शर्तें क्या हैं?

अमेरिका चाहता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों, वह अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखे।