ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए एक बार फिर पाकिस्तान की धरती पर बातचीत की कोशिश शुरू हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंचे हैं। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से कोई सीधी बात नहीं करेगा और अपनी बातें केवल बिचौलियों के जरिए ही रखेगा।

पाकिस्तान में क्या चल रहा है और ईरान का क्या स्टैंड है?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची चर्चा के लिए इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। उनके प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ईरान का अमेरिका के साथ फिलहाल कोई सीधा संवाद तय नहीं है। ईरान अपनी राय और प्रस्ताव पाकिस्तान सरकार को देगा, जिसे बाद में अमेरिका तक पहुंचाया जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

अमेरिका का क्या कहना है और क्या खतरा है?

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि अमेरिकी दूत पाकिस्तान गए हैं। अमेरिका ने कहा कि वह पाकिस्तान के जरिए ईरान का शांति प्रस्ताव सुनने के लिए तैयार है। दूसरी तरफ, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।

अब तक की बातचीत और पुराने विवाद क्या हैं?

8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मदद से दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ था। 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहली दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बनी। ईरान ने अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों को बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट बताया है। इस बीच, लेबनान में इजराइल के हवाई हमलों ने भी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.