अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत अब तनावपूर्ण हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है, जिसके बाद ईरान के संसद स्पीकर ने पलटवार किया है। यह पूरा मामला लेबनान और पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने की कोशिशों से जुड़ा है।
बातचीत और समझौता
दोनों देशों के बीच 17 जून 2026 को एक अंतरिम समझौता (MoU) हुआ था। इस समझौते का मकसद पश्चिम एशिया में लड़ाई को रोकना और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई बंद करना था। इसी समझौते को लागू करने के लिए 21 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में तकनीकी बातचीत शुरू हुई, लेकिन यह सत्र केवल 80 मिनट चला और फिर आंतरिक चर्चा के लिए इसे रोक दिया गया।
ट्रंप की धमकी और ईरान का जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह लेबनान में अपने महंगे गुर्गों (proxies) को तुरंत रोके। उन्होंने धमकी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान पर बहुत बड़ा हमला करेगा।
इस बयान पर ईरान के संसद स्पीकर और मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रंप की चेतावनी को अमेरिका की ‘हताशा’ बताया और कहा कि ईरान ऐसी धमकियों से नहीं डरेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान की सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और लेबनान विवाद
- अमेरिका का रुख: Donald Trump ने चेतावनी दी कि अगर 60 दिनों में डील नहीं हुई, तो अमेरिका Strait of Hormuz पर कब्जा कर सकता है और वहां टोल टैक्स लगा सकता है।
- ईरान का दावा: ईरान की सेना ने 20 जून 2026 को दावा किया कि लेबनान में इसराइल के हमलों के कारण उन्होंने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है।
- इसराइल का स्टैंड: प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ किया है कि इसराइल ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा और Hezbollah पर दबाव बनाए रखेगा।
अन्य अहम जानकारियां
तनाव के बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने उम्मीद जताई कि दोनों देश अपने रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू कर सकते हैं। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि जब तक लेबनान में लड़ाई बंद नहीं होती और ईरान की जमी हुई संपत्ति वापस नहीं मिलती, तब तक अंतिम समझौते पर बात नहीं हो सकती।
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने यह भी कहा कि ईरान को यूरेनियम समृद्ध करने का पूरा हक है, लेकिन वह परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता।
