ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत में ‘युद्ध हर्जाने’ यानी नुकसान की भरपाई एक बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है, तो दूसरी तरफ ईरान ने भी पलटवार की कड़ी धमकी दी है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या अगले दौर की बातचीत से मामला सुलझेगा या हालात और बिगड़ेंगे।

ℹ️: Israel-Lebanon War: लेबनान में महिलाओं और बच्चों का बुरा हाल, एक ही दिन में मारी गईं 99 महिलाएं

ईरान और अमेरिका के बीच मुख्य विवाद क्या हैं?

ईरान की मांग है कि अमेरिका उसे 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों के लिए मुआवजा दे और उसकी जमी हुई संपत्ति वापस करे। वहीं, अमेरिका की शर्तें काफी सख्त हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा करे और यूरेनियम संवर्धन का काम पूरी तरह बंद कर दे।

ईरान की मांगें अमेरिका की शर्तें
युद्ध के नुकसान का हर्जाना परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता
जमी हुई संपत्ति की वापसी यूरेनियम संवर्धन को बंद करना
सभी प्रतिबंधों को हटाना प्रमुख संवर्धन केंद्रों को खत्म करना
युद्ध का पूरी तरह अंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना
व्यापार में सुधार हमास और हिजबुल्लाह की फंडिंग रोकना

अमेरिकी नाकाबंदी और ईरान की जवाबी धमकी का क्या मतलब है?

13 अप्रैल 2026 से अमेरिकी सेना ने ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय इलाकों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। अमेरिका का कहना है कि यह नियम सभी देशों के जहाजों पर लागू होगा जो ईरानी बंदरगाहों में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं।

इस कार्रवाई के बाद ईरान ने तुरंत चेतावनी दी है कि अब फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान का कहना है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं। व्हाइट हाउस का मानना है कि इस नाकाबंदी से ईरान पर दबाव बढ़ेगा और वह समझौते के लिए मजबूर होगा।

क्या दोबारा बातचीत से मामला सुलझ सकता है?

पाकिस्तान में हुई पहली बातचीत 11 अप्रैल को बिना किसी समझौते के खत्म हो गई थी। अब खबरें आ रही हैं कि एक नए दौर की इन-पर्सन बातचीत की तैयारी चल रही है ताकि अगले हफ्ते सीजफायर खत्म होने से पहले कोई रास्ता निकाला जा सके।

ईरान ने अपनी एक 10 सूत्रीय योजना पेश की है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के इस्तेमाल के लिए जहाजों से शुल्क लेने की बात कही गई है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक नई बातचीत की पुष्टि नहीं की है, लेकिन राजनयिकों का कहना है कि दोनों पक्ष बातचीत के लिए सहमत हो सकते हैं।