पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक हुई. यह बातचीत शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को हुई और तकनीकी स्तर पर चर्चा चलाने के लिए दो घंटे से ज़्यादा का समय लगा. पाकिस्तान ने इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई ताकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद सुलझ सकें.

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बैठक में कौन शामिल था और क्या थी मुख्य बातें?

इस बैठक में ईरान और अमेरिका दोनों तरफ से बड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. ईरान की तरफ से एक बड़ा दल आया था जिसमें आर्थिक और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ शामिल थे. वहीं अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति और उनके खास दूतों ने शिरकत की. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भी इस प्रक्रिया में मदद की.

पक्ष प्रमुख सदस्य/मुद्दे
ईरानी प्रतिनिधिमंडल संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf, विदेश मंत्री Abbas Araghchi, और 70 सदस्य
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल उपराष्ट्रपति JD Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner और Brad Cooper
मुख्य मुद्दे स्थायी युद्धविराम और Strait of Hormuz को फिर से खोलना
अन्य मुद्दे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जमी हुई संपत्ति की वापसी
मध्यस्थ पाकिस्तान और सऊदी अरब (समन्वय)
विवादित मुद्दा दक्षिण लेबनान की स्थिति

क्षेत्रीय तनाव और सऊदी अरब का क्या रोल रहा?

बातचीत के दौरान तनाव भी देखा गया जब अमेरिका का एक युद्धपोत Strait of Hormuz की तरफ बढ़ा. इस पर ईरान ने तुरंत पाकिस्तान के ज़रिए चेतावनी भेजी जिसके बाद उस जहाज़ को रुकना पड़ा. इस पूरे मामले में पाकिस्तान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने आपस में तालमेल बिठाया. दोनों देशों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुआ समझौता लागू होना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे.

आगे क्या होने की उम्मीद है?

ईरान ने अपनी शर्तें रखी हैं कि सीधी बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब लेबनान में युद्धविराम होगा और उसकी जमी हुई संपत्ति वापस मिलेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि अब बातचीत सामान्य चर्चा से निकलकर तकनीकी दौर में पहुँच गई है. इस वजह से चर्चा को एक और दिन बढ़ाने की संभावना बनी हुई है ताकि सभी तकनीकी बारीकियों को पूरा किया जा सके.