ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम (truce) को लेकर चल रही बातचीत में एक नया मोड़ आया है. ईरान के बड़े अधिकारी ने दोहा में होने वाली तकनीकी बैठकों की खबरों को गलत बताया है, जबकि दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि बातचीत तय समय पर होगी. इस खींचतान से अब पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर हैं कि क्या दोनों देश शांति समझौते पर सहमत होंगे.

ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काज़ेम गरबबादी (Kazem Gharibabadi) ने साफ़ किया है कि इस हफ्ते वर्किंग-ग्रुप की कोई तकनीकी बैठक तय नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि कतर के साथ बातचीत जारी है, लेकिन दोहा में मीटिंग होने की खबरों की पुष्टि नहीं की जा सकती. गरबबादी के मुताबिक, पहली तकनीकी बैठक तभी होगी जब ज़रूरी शर्तें पूरी होंगी और दोनों पक्ष तारीख और जगह पर सहमत होंगे. इसके लिए मध्यस्थ देशों के ज़रिए बातचीत चल रही है.

वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने अलग बात कही है. अमेरिका का दावा है कि ईरान और अमेरिका ने हमलों को रोकने पर सहमति जताई है और 30 जून को दोहा में तकनीकी बातचीत शुरू हो सकती है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह मीटिंग सिर्फ हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लिए नहीं, बल्कि समझौते (MoU) के सभी हिस्सों पर होगी ताकि जहाजों की आवाजाही फिर से सुरक्षित हो सके.

इस बीच ईरान और ओमान के बीच मस्कट में ‘जॉइंट हॉर्मुज़ कमेटी’ की पहली बैठक हुई. इस बैठक में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के भविष्य के मैनेजमेंट को लेकर चर्चा की गई. इसी दौरान ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर शिपिंग जहाजों ने उनके बताए रास्ते को छोड़कर दूसरा रास्ता अपनाया, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है.

बता दें कि इससे पहले 23 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में बातचीत हुई थी. तब परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों को हटाने और आर्थिक विकास के लिए चार वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी थी. लेकिन हालिया सैन्य तनाव की वजह से अब बातचीत का केंद्र स्विट्जरलैंड से बदलकर दोहा, कतर हो गया है.