ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ताजा धमकी के बाद ईरान ने कड़ा जवाब दिया है। ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Baqer Ghalibaf ने साफ कह दिया है कि तेहरान अमेरिका की ऐसी धमकियों को गंभीरता से नहीं लेता है।
यह पूरा विवाद रविवार, 21 जून 2026 को शुरू हुआ। राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी थी कि अगर लेबनान में ईरान के समर्थित संगठन परेशानी खड़ी करना बंद नहीं करते, तो वे ईरान पर पहले से भी ज्यादा जोरदार हमला करेंगे।
ईरान का जवाब और कड़ी चेतावनी
IRNA न्यूज एजेंसी के मुताबिक, Mohammad Baqer Ghalibaf ने कहा कि अमेरिका अब हताशा में है। उन्होंने बताया कि पिछली बार की अमेरिकी धमकियां अपने मकसद में नाकाम रही थीं। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे अपने सार्वजनिक बयानों में सावधानी बरतें, वरना इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
Ghalibaf ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि अमेरिका को यह सोचना चाहिए कि अगर उनकी धमकियों का कोई असर होता, तो वे आज इस स्थिति में नहीं होते। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की सेना किसी भी उकसावे का जवाब देने के लिए तैयार खड़ी है और जरूरत पड़ने पर अलग तरीकों से कार्रवाई की जाएगी।
बातचीत पर पड़ा असर
इस विवाद का असर स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत पर भी पड़ा। ट्रंप की धमकियों के विरोध में ईरान का negotiating delegation बातचीत वाली जगह से चला गया।
- पाकिस्तान और कतर इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे ताकि दोनों देशों के बीच बातचीत बनी रहे।
- जून 2026 की शुरुआत में ईरान और अमेरिका ने एक समझौता (MoU) साइन किया था, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग न करने का वादा किया था।
